November 2024

 






प्रेस विज्ञप्ति 30/11/2024

प्राकृतिक खेती से स्वस्थ मिट्टी व भोजन मिलेगा पर प्रोसेस्ड फूड से होगी 
आमदनी- आरजेएस वेबिनार 

मृदा दिवस पर प्राकृतिक खेती के जनक राजा भूमिबोल, दार्शनिक फुकुओका और सुभाष पालेकर को आरजेसियंस ने दी श्रद्धांजलि.

विश्व मृदा दिवस पर माता रामरती देवी मंदिर के सहयोग से प्राकृतिक खेती पर आरजेएस पीबीएच वेबिनार आयोजित.

नई दिल्ली। बिना उर्वरक के प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार की योजना राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन(एनएमएनएफ) की मंजूरी के मद्देनजर किसानों को जागरूक करने के लिए विश्व मृदा दिवस(5 दिसंबर) के उपलक्ष्य में आरजेएस पीबीएच ने कार्यक्रम आयोजित किया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि आईएआरआई पूसा के वरिष्ठ वैज्ञानिक डा.चंद्रभान सिंह, मुख्य वक्ता भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक और अतिथि वक्ता कृषि जागरण की पत्रकार श्रृति जोशी ने 
प्राकृतिक खेती: स्वस्थ मिट्टी स्वस्थ भोजन विषय पर अपने विचार व्यक्त किए ।
राम-जानकी संस्थान पाॅजिटिव ब्राॅडकास्टिंग हाउस (आरजेएस पीबीएच) और आरजेएस पॉजिटिव मीडिया के संस्थापक व राष्ट्रीय संयोजक उदय कुमार मन्ना के संयोजन व संचालन  में राजेन्द्र सिंह कुशवाहा संस्थापक -माता रामरती देवी मंदिर कृषक प्रयोगशाला एवं कृषक पर्यटन के स्थल, कान्धरपुर, गाज़ीपुर उत्तर प्रदेश के सहयोग से प्राकृतिक खेती: स्वस्थ मिट्टी स्वस्थ भोजन पर 29 नवंबर 2024 को  वेबिनार आयोजित किया गया था.
श्री राजेन्द्र सिंह कुशवाहा, अतिथि संपादक आरजेएस पीबीएच न्यूज़ लेटर 
ने अतिथियों का स्वागत किया और उनकी उपस्थिति में न्यूज़ लेटर नवंबर अंक पर प्रकाश डाला। आरजेएस पीबीएच के ऑब्जर्वर प्रफुल्ल डी शेठ -रंजनबेन शेठ ने सकारात्मक आंदोलन में विशेष सहयोग करने के लिए मौ.इशहाक खान और पाॅजिटिव मीडिया संस्थान समाचार निर्देश, नजफगढ़ मेट्रो और द्वारका परिचय को सर्टिफिकेट ऑफ अप्रिसिएशन प्रदान किया। उन्होंने कहा कि प्रवासी भारतीय सम्मान समारोह 15 जनवरी 2025 को नई दिल्ली में एनआरआई और 
ट्रू आरजेसियंस की उपस्थिति में आरजेएस का ग्रंथ 04 पुस्तक का लोकार्पण किया जाएगा।
इस अवसर पर प्राकृतिक खेती के जनक राजा भूमिबोल, दार्शनिक फुकुओका और सुभाष पालेकर को आरजेसियंस ने  श्रद्धांजलि दी.
डा. चंद्रभान सिंह ने प्राकृतिक खेती के तरीकों की आवश्यकता और उत्पादकता बढ़ाने के लिए तरीकों की क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि  सब्सिडी के साथ साथ किसान  प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट्स से अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं। उन्होंने प्राकृतिक खेती की क्षमता, रीसाइकलिंग और खाद बनाने के महत्व का भी उल्लेख किया।
श्री धर्मेंद्र मलिक ने जैविक खेती, कीटनाशकों और उर्वरकों का उपयोग, अनुवांशिक रूप से संशोधित बीज ,बीज संरक्षण और प्रौद्योगिकी के माध्यम से मूल्य संवर्धन आदि विषयों पर किसानों को जागरूक किया। कृषि पत्रकार श्रृति जोशी ने प्राकृतिक खेती के महत्व पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम में कृषि पत्रकार अनिकेत सिन्हा, किसान राजवीर सिंह और सुमित कुमार त्यागी, सुदीप साहू,रजनीकांत शुक्ल, उदय शंकर सिंह,स्वीटी पॉल, सुषमा सिंह, गीता मौर्या, आकांक्षा मयंक और कपिल आदि शामिल रहे।

आकांक्षा 
हेड क्रिएटिव टीम 
आरजेएस पीबीएच 
8368626368

 





प्रेस विज्ञप्ति 24/11/2024

संविधान दिवस पर प्रभात नमकीन आरडी फूड प्रोडक्ट्स के सहयोग से आरजेएस का कार्यक्रम आयोजित।

संविधान में लोकतांत्रिक मूल्य: एक जीवन-दर्शन पर 
आरजेएस पीबीएच वेबिनार आयोजित 

26 नवं. संविधान दिवस से 26 जन. तक चलेगा आरजेएस-प्रभात नमकीन का संविधान जागरूकता अभियान 

नई दिल्ली। राम जानकी  संस्थान पीबीएच द्वारा 26 नवम्बर संविधान दिवस के उपलक्ष्य में डेमोक्रेटिक वैल्यू इन द कांस्टीट्यूशन: ए फिलोसफी ऑफ लाईफ ,संविधान में लोकतांत्रिक मूल्य: एक जीवन-दर्शन विषय पर वेबीनार का आयोजन संस्थापक उदय कुमार मन्ना के संयोजन व संचालन में किया गया.
वेबिनार के सह-आयोजक लक्ष्मण प्रसाद निदेशक प्रभात नमकीन, आरडी फूड प्रोडक्ट्स ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि किसी भी देश को चलाने के लिए संविधान का होना अत्यंत आवश्यक है। साथ ही लोगों को संविधान की व्यापक और गहरी समझ होना चाहिए। जब तक यह नहीं होगा, लोगों में संवैधानिक मूल्यों का विकास नहीं होगा। जब तक हम  अपने मूल अधिकार और कर्तव्य से हम वाकिफ नहीं होंगे, तब तक हमारे विकास और सामाजिक परिवर्तन का कोई अर्थ नहीं है। संविधान निर्माता डा. अम्बेडकर को इस अवसर पर याद किया गया। श्री मन्ना ने 26 नवंबर संविधान दिवस से 26 जनवरी संविधान लागू गणतंत्र दिवस तक जागरूकता अभियान शुरू करने की घोषणा की। इस अवसर पर बलराम प्रजापति लिखित पुस्तक इंडियन पाॅलिटी की पीडीएफ लोगों को भेजी गई।
अमृत काल में राष्ट्र प्रथम भारत एक घर विश्व एक परिवार की भावना को मजबूती प्रदान करते हुए आरजेएस पीबीएच के 285 वें कार्यक्रम में भारतीय संविधान की चर्चा हुई.
मुख्य अतिथि शबनम खान समाजसेवी व टीवी पैनलिस्ट ने कहा कि संविधान में जरूरत के अनुसार संशोधन होते रहते हैं. हम सबका मकसद संविधान के विषय में जागरूकता फैलाना है. हमारा जीवन हवा पानी प्रदूषण सब राजनीति की देन है. हमें राजनीति में हिस्सा लेना चाहिए. 
शबनम ने संस्कृति, राजनीति और कार्यान्वयन सहित विभिन्न विषयों पर चर्चा की। उन्होंने व्हाइटबोर्ड की आवश्यकता और समानता के महत्व का भी उल्लेख किया। टीम ने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों की अवधारणा पर भी चर्चा की, जिसमें कमल ने दूसरों से पहले अपने कर्तव्यों का पालन करने की आवश्यकता पर जोर दिया। 
 पूर्व अध्यक्ष दिल्ली बार काउंसिल के एडवोकेट मुरारी तिवारी ने संविधान दिवस की बधाई दी और कहा कि भारतीय संविधान ने हमें अभिव्यक्ति का अधिकार दिया है. समानता का अधिकार है. कोई भी संविधान के साथ छेड़छाड़ करके की सोचे तो जनता मुखर विरोध करती है. बदलते सामाजिक परिदृश्य और संवैधानिक संशोधनों की आवश्यकता के बारे में चिंताओं को दूर करते हुए, तिवारी ने स्वीकार किया कि परिवर्तन अपरिहार्य है। उन्होंने कहा कि जबकि संविधान के मूल सिद्धांतों, विशेषकर मौलिक अधिकारों को बदला नहीं जा सकता है, अन्य पहलुओं को विकसित होते समाज की जरूरतों को पूरा करने के लिए अनुकूलित किया जा सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन मूल मूल्यों को सर्वोच्च न्यायालय के फैसलों द्वारा संरक्षित किया गया है, जिसमें संविधान की "बुनियादी संरचना" पर जोर दिया गया है, जिसे बदला नहीं जा सकता।
तिवारी ने अंत में नागरिकों से चुनावों के दौरान सतर्क रहने की अपील की, उनसे अपने मतदान के अधिकार का बुद्धिमानी से प्रयोग करने और ऐसे उम्मीदवारों को चुनने का आग्रह किया जो वास्तव में उनके हितों का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने दोहराया कि जबकि प्रत्येक उम्मीदवार के अपने मूल्य होते हैं, मतदाताओं को अवास्तविक वादे करने वालों से सावधान रहना चाहिए। उन्होंने शिक्षित युवाओं के चुनावी प्रक्रिया में भाग लेने के महत्व पर भी ज़ोर दिया, यह देखते हुए कि जबकि लोकतांत्रिक प्रक्रिया चुनाव लड़ने के लिए आयु सीमा को पूरा करने वाले किसी भी व्यक्ति को अनुमति देती है, अधिक शिक्षित प्रतिनिधित्व की ओर बदलाव चल रहा है।
बलराम प्रजापति जी ने इंडियन पोलिटी पुस्तक भारतीय संविधान को लेकर लिखा है जो छात्रों के लिये और जो  संविधान समझना चाहते हैं, उनके लिए उपयोगी है. बलराम प्रजापति कम्प्यूटर एक्सपर्ट हैं. उन्होंने कहा कि सरकारें बदलती हैं लेकिन देश संविधान से चलता रहता है. 
स्वीटी पॉल पूर्व अधिकारी आईटीपीओ ने संविधान के विषय में वाट्सएप के माध्यम से जागरूक करने पर जोर दिया. सुरजीत सिंह दीदेवार ने कहा कि बदलते हालात में संविधान परिवर्तन जरूरी है. प्रभात नमकीन के निदेशक लक्ष्मण प्रसाद ने धन्यवाद ज्ञापित किया. सभी जुड़े लोगों से 15 जनवरी 2025 को दिल्ली में  प्रवासी भारतीय सम्मेलन को सफल बनाने के लिये विदेश गये भारतीयों तक संदेश पहुंचाने की अपील की गई.इस अवसर पर 300 वें कार्यक्रम में  प्रवासी भारतीयों को सम्मानित किया जायेगा. टेक्नीकल टीम और क्रिएटिव टीम ने तकनीकी सहयोग और यूट्यूब पर अपलोड करने में और रिकार्डिंग में सहयोग किया तथा उनको धन्यवाद ज्ञापित किया गया.बातचीत सकारात्मकता और दयालुता के महत्व पर ध्यान केंद्रित करने के साथ समाप्त हुई।

आकांक्षा 
हेड क्रिएटिव टीम 
आरजेएस पीबीएच 
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प्रेस विज्ञप्ति 19/11/2024

प्राकृतिक चिकित्सा दिवस पर आरजेएस पीबीएच कार्यक्रम अध्यात्म से आनंद की ओर पटना में आयोजित.

प्रभारी आरजेएस युवा टोली,पटना के दम्पति 
को संस्थापक दम्पति ने प्रशंसा प्रमाण -पत्र प्रदान किया 

पटना। राम-जानकी संस्थान पाॅजिटिव ब्राॅडकास्टिंग हाउस (आरजेएस पीबीएच) और आरजेएस पॉजिटिव मीडिया के संयुक्त तत्वावधान में पटना बिहार में 18 नवंबर प्राकृतिक चिकित्सा दिवस पर अध्यात्म से आनंद की ओर कार्यक्रम आयोजित किया गया।
इस अवसर पर आरजेएस पीबीएच के संस्थापक दम्पति उदय कुमार मन्ना और श्रीमती बिन्दा मन्ना ने आरजेएस युवा टोली  आरजेएस युवा टोली पटना के प्रभारी दम्पति साधक ओमप्रकाश और श्रीमती कौशल्या देवी को सकारात्मक भारत-उदय वैश्विक आंदोलन में उत्कृष्ट कार्य के लिए प्रशंसा प्रमाण- पत्र प्रदान किया गया। इस अवसर पर राष्ट्रीय प्राकृतिक चिकित्सा दिवस का संदेश पतंजलि के बिहार व झारखंड प्रमुख डा.अजित कुमार, डा.भगवान मिश्रा और स्वामी कौशल ने दिया।
कार्यक्रम का आरंभ अध्यात्मिक शांति के लिए हवन-यज्ञ और तुलसी पूजा गायत्री मंत्र से हुआ।
तत्पश्चात दिल्ली से पटना पहुंचे आरजेएस पीबीएच संस्थापक व राष्ट्रीय संयोजक उदय कुमार मन्ना ने सकारात्मक आंदोलन के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए आगामी  15 जनवरी और 19 जनवरी,2025 को प्रवासी भारतीय और देसीय प्रवासी भारतीय सम्मान समारोह आयोजित करने की घोषणा की। 
साधक ओमप्रकाश ने अध्यात्म से आनंद की ओर विषय पर संबोधित करते हुए कहा कि अध्यात्म हमें सकारात्मक जीवन जीने की प्रेरणा देता है। भगवान विष्णु और नारद के सकारात्मक कार्यों का उन्होंने सोदाहरण उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि दिव्य आत्मा का आभास कैसे होता है? युवा टोली के सदस्य वैभव भारद्वाज के प्रश्न कि आधुनिक युग में बेटी के विवाह के लिए हम तमाम मानकों में सम्बंध को मापते हैं और  विभिन्न माध्यमों से संबंधियों के बारे में जानकारी प्राप्त करने के बावजूद विवाह के उपरांत विवाह सफल नहीं हो रहा हैं, इसमें अध्यात्म हमारी मदद कैसा कर सकता हैं ?

बिहार और झारखंड के पतंजलि प्रमुख  डा. अजित कुमार ने प्राकृतिक उपचार, ध्यान तकनीकों और स्वास्थ्य को बनाए रखने में विभिन्न अंगों की भूमिका के महत्व को बताया। इसके अतिरिक्त उन्होंने कहा कि 
पतंजलि वेलनेस सेंटर की टीम विभिन्न जिलों में वेलनेस सेंटर के माध्यम से प्राकृतिक चिकित्सा मुहैया करा रही है।  RJS टीम अपने प्रसारणों के माध्यम से प्राकृतिक उपचार और आयुर्वेदिक प्रथाओं को और बढ़ावा देगी। वेलनेस सेंटर टीम कब्ज जैसी आम बीमारियों के लिए प्राकृतिक उपचार पेश करती है ।
• आरजेएस टीम सुबह की दिनचर्या और उचित नींद की आदतों के लाभों के बारे में जागरूकता पैदा करेगी।
 पतंजलि टीम जैविक खाद्य उत्पादों को विकसित और बढ़ावा देगी।आरजेएस टीम युवाओं को प्रकृति और पारंपरिक प्रथाओं से जुड़ने के महत्व के बारे में शिक्षित करेगी। इस अवसर पर लेखक अर्जुन प्रसाद और पत्रकार अनिकेत सिन्हा तथा सपना ने भी अपने विचार व्यक्त किए। 

आकांक्षा 
हेड क्रिएटिव टीम 
आरजेएस पीबीएच 
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प्रेस विज्ञप्ति 17/11/2024

दीदेवार जीवन ज्योति के सहयोग से दर्शन दिवस पर "समस्याओं के समाधान" नामक आरजेएस कार्यक्रम.

आदि शंकराचार्य और लाला लाजपत राय को आरजेसियंस की श्रद्धांजलि.

नई दिल्ली। अंतर्राष्ट्रीय दर्शन दिवस‌ पर आरजेएस पीबीएच - आरजेएस पॉज़िटिव मीडिया प्रमुख उदय कुमार मन्ना द्वारा 17 नवंबर, 2024 को
अमृत काल का साकारात्मक भारत-उदय -
*281वाँ वेबिनार* --"क्या दर्शन में समस्याओं का समाधान है?" आयोजित किया गया।
वेबिनार में दर्शन शास्त्र के पुरोधा आदि शंकराचार्य और स्वतंत्रता सेनानी लाला लाजपत राय को आरजेसियंस की ओर से श्रद्धांजलि दी गई.
बैठक में दर्शनशास्त्र, मनोविज्ञान और भारतीय संस्कृति पर चर्चा की गई, जिसमें इन विषयों और आध्यात्मिकता के बीच संबंध पर ध्यान केंद्रित किया गया। प्रतिभागियों ने मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों और उन्हें संबोधित करने के लिए दर्शन शास्त्र के संभावित उपयोग पर भी चर्चा की।  आगामी प्रवासी भारतीय सम्मान समारोह 15 जनवरी और 19 जनवरी 2025 की योजना बनाई गई और  कार्य सौंपे गए और विभिन्न क्षेत्रों और समुदायों से रसद, समावेशिता और भागीदारी पर चर्चा की गई।
मुख्य वक्ता सुरजीत सिंह दीदेवार संस्थापक दीदेवार जीवन ज्योति ने दर्शनशास्त्र, मनोविज्ञान और भारतीय संस्कृति से संबंधित विभिन्न विषयों पर व्याख्यान दिए। उन्होंने दर्शनशास्त्र (दर्शन) का अर्थ और प्राचीन भारतीय परंपराओं (सनातन) से इसके संबंध को समझाया।  उन्होंने दर्शनशास्त्र और मनोविज्ञान दोनों का अध्ययन करने के महत्व पर प्रकाश डाला। चर्चा में भारतीय संदर्भ में दर्शनशास्त्र, मनोविज्ञान और आध्यात्मिकता के बीच संबंधों को शामिल किया गया है। सुरजीत सिंह ने मानसिक बीमारी और उपचार को संबोधित करते हुए कहा कि मानसिक बीमारी और इसे संबोधित करने की तकनीकों पर, बीमारी के बजाय रोगी पर ध्यान केंद्रित करने का सुझाव देते हैं। रेणु शर्मा ने मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं को ठीक करने के लिए दर्शन शास्त्र का उपयोग करने के बारे में पूछती हैं। सुरजीत सिंह दीदेवार मूल कारणों को समझने और व्यक्ति का समग्र रूप से इलाज करने पर जोर देते हैं। उन्होंने बताया कि अलग-अलग बीमारी का इलाज व्यक्ति व्यक्ति की अवस्था पर निर्भर है। सबके लिए एक इलाज संभव नहीं।

आकांक्षा 
हेड क्रिएटिव टीम 
आरजेएस पीबीएच 
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प्रेस‌ विज्ञप्ति 17/11/2024


सहिष्णुता व प्रेस दिवस पर माता रामरती देवी मंदिर के सहयोग से आरजेएस पीबीएच सहिष्णुता कार्यक्रम आयोजित.

बीके प्रशांत भाई और प्रवासी भारतीय डा.श्वेता गोयल ने सहिष्णु समाज का महत्व बताया.

पटना। राम-जानकी संस्थान पाॅजिटिव ब्राॅडकास्टिंग हाउस (आरजेएस पीबीएच) द्बारा राजेन्द्र सिंह कुशवाहा, संस्थापक माता रामरती देवी मंदिर कृषक प्रयोगशाला एवं कृषक पर्यटन स्थल, कान्धरपुर, गाज़ीपुर उत्तर प्रदेश के सहयोग से अंतर्राष्ट्रीय सहिष्णुता दिवस और राष्ट्रीय प्रेस दिवस पर 16 नवंबर 2024 को कार्यक्रम आयोजित किया गया।
आरजेएस पीबीएच संस्थापक उदय कुमार मन्ना के संयोजन व संचालन में आयोजित इस ऑनलाइन कार्यक्रम में ब्रह्मकुमारीज संस्थान के राष्ट्रीय प्रवक्ता और मीडिया समन्वयक तथा ऑस्ट्रेलिया में प्रवासी भारतीय डा.श्वेता गोयल ने सकारात्मक संवाद और समझ को बढ़ावा देना विषय पर बोलते हुए
समाज में सहिष्णुता को बढ़ावा देने पर बल दिया।
यह समाज में सकारात्मक मूल्यों को बढ़ावा देने और सार्थक संचार को प्रोत्साहित करने की उनकी प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।
सह- आयोजक राजेंद्र सिंह कुशवाहा ने इसे वसुधैव कुटुम्बकम - पूरी दुनिया एक परिवार है, की अवधारणा से जोड़ा, जो भारतीय संस्कृति का एक केंद्रीय दर्शन है जो विविधता में एकता को बढ़ावा देता है।
श्री कुशवाहा ने राष्ट्रीय प्रेस दिवस के महत्व को भी संबोधित किया।उन्होंने निष्पक्ष रिपोर्टिंग की आवश्यकता पर जोर दिया जो जनता को सूचित और शिक्षित करने को प्राथमिकता देती है।

आरजेएस पीबीएच के संस्थापक उदय मन्ना ने बताया कि 19 जनवरी 2025 को होने वाला सम्मेलन में आरजेएस पीबीएच के ग्रंथ 04 का लोकार्पण, भारत के भीतर विभिन्न राज्यों में स्थानांतरित हुए भारतीयों के योगदान को पहचानने पर केंद्रित है। 
कार्यक्रम में 15 जनवरी 2025 को दिल्ली में प्रवासी भारतीयों(NRIs) के साथ मीडिया कांफ्रेंस करने की जानकारी दी गई।
इंटरनेशनल फेस्टिवल ऑफ जर्नलिज्म के अवसर पर नोएडा के मारवाह स्टूडियो में एक कार्यक्रम 13 फरवरी 2025 को निर्धारित है। 
प्रवासी भारतीयों का महत्व
 श्री मन्ना ने वसुधैव कुटुम्बकम को भारतीय दर्शन का एक अभिन्न अंग बताया उन्होंने प्रवासी भारतीयों‌ को भारत के साथ उनके अंतर्संबंध पर जोर दिया, उन्हें बरगद के पेड़ की तरह फैलते और बढ़ते हुए चित्रित किया, जो भारतीय संस्कृति के सार को अपने साथ ले जाते हैं और उसका पोषण करते हैं।

कंधारपुर को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करना
श्री कुशवाहा ने अपने गाँव, कंधारपुर को एक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के अपने दृष्टिकोण के बारे में भी बताया। उन्होंने अपनी कृषि पद्धतियों, स्थानीय व्यवसायों और उत्पादन सुविधाओं सहित भारतीय ग्रामीण जीवन की समृद्धि का अनुभव करने के लिए घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय पर्यटकों को आमंत्रित करने के अपने इरादे व्यक्त किए। 
भगवद गीता के चश्मे से सहिष्णुता
मुख्य वक्ता, ऑस्ट्रेलिया में स्थित एक व्याख्याता और प्रेरक वक्ता, डॉ. श्वेता गोयल ने भगवद गीता की शिक्षाओं के माध्यम से इसकी जांच करके सहिष्णुता की गहरी समझ प्रदान की। उन्होंने सहिष्णुता के चार प्रमुख पहलुओं धैर्य,आत्म-नियंत्रण,
समानता और क्षमा पर जोर दिया।
: डॉ. गोयल ने क्रोध और आक्रोश को छोड़ने के महत्व पर जोर दिया। 
सकारात्मक संचार और आंतरिक परिवर्तन
ब्रह्मा कुमारियों संगठन के राष्ट्रीय प्रवक्ता और मीडिया समन्वयक और कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बीके सुशांत ने सहिष्णुता के महत्व पर प्रकाश डालते हुए पत्रकारों से अपनी भूमिका को प्रभावी ढंग से पूरा करने के लिए धैर्य, विनम्रता और उदारता विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने संचार के विभिन्न स्तरों पर भी चर्चा की: अंतःवैयक्तिक, अंतर्वैयक्तिक, समूह और जन संचार। उन्होंने जोर देकर कहा कि अंतःवैयक्तिक संचार में सुधार, वह बातचीत जो हम खुद से करते हैं, संचार के अन्य सभी रूपों को बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने आत्म-चिंतन की वकालत की और दर्शकों को शांति, प्रेम, पवित्रता और आनंद जैसे सकारात्मक गुणों पर आधारित आत्मा-केंद्रित दृष्टिकोण विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया।

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प्रेस विज्ञप्ति 10/112024

आरजेएस पीबीएच वेबिनार में बीके अनुसूया व योगी प्रेम भाटिया ने करूणा को मानवीयता का चरमोत्कर्ष बताया.

विश्व दयालुता दिवस पर आरजेसियंस ने दार्शनिक ए. नागराज को श्रद्धांजलि दी.

नई दिल्ली। राम जानकी संस्थान पॉजिटिव ब्रॉडकास्टिंग हाउस (आरजेएस पीबीएच) के 279वां कार्यक्रम में रविवार 10 नवंबर 2024 को वक्ताओं ने करुणा और दया को आत्म-परिवर्तन का प्रकाश और मानवीयता का चरमोत्कर्ष बताया।आरजेएस पीबीएच के संस्थापक व राष्ट्रीय संयोजक उदय कुमार मन्ना के संयोजन व संचालन में 
विश्व दयालुता दिवस 13 नवंबर के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम ने 
 एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की। प्रतिभागियों ने दयालुता को अपनाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम की शुरुआत हिमाचल प्रदेश की संगीत शिक्षिका रितु कपिल टेकरा के सुमधुर गाए वंदना गीत से हुई।

कर्नाटक के दार्शनिक श्री ए. नागराज जी के "मध्यस्थ दर्शन" और "जीवन विद्या" की शिक्षाएँ को  कार्यक्रम के सह-आयोजक और मुख्य वक्ता विश्व भारती योग संस्थान के संस्थापक व निदेशक आचार्य योगी कवि प्रेम भाटिया ने  दयालुता और करूणा के मूल सिद्धांतों पर प्रकाश डाला, करुणा को केवल भावुकता के रूप में नहीं, बल्कि मानव स्वभाव के सार के रूप में प्रस्तुत किया । श्री भाटिया ने कहा कि उन्होंने मानव धर्म की जटिलताओं का पता लगाया और  सार्वभौमिक मानवीय सुख की खोज पर प्रकाश डाला। उन्होंने "धीरता" (धार्मिक जीवन), "वीरता" (दूसरों को सशक्त बनाना), और "उदारता" (तन, मन और संसाधनों की उदारता) के महत्वपूर्ण गुणों का परिचय दिया, जो सच्ची मानवता की ओर मार्ग की रूपरेखा तैयार करते हैं। उन्होंने जीव दया और प्रकृति संरक्षण के लिए भी अपनी कविताओं से ज़ोरदार आवाज़ दी"अच्छे का फल अच्छा ही मिलता है"।

मुख्य अतिथि वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका, बीके अनुसूया दीदी ने ब्रह्मा कुमारियों के करुणा के दृष्टिकोण के साथ चर्चा को समृद्ध किया। उन्होंने आधुनिक समाज में सहानुभूति की व्यापक कमी पर शोक व्यक्त किया, बदला लेने की प्रवृत्ति और पारिवारिक और सामाजिक बंधनों के टूटने पर प्रकाश डाला। उन्होंने दूसरों के प्रति दयालुता बढ़ाने की नींव के रूप में आत्म-करुणा के महत्व पर जोर दिया। दीदी ने बताया कि सच्ची करुणा भौतिक दान से आगे बढ़कर, तनाव और असंतोष से जूझ रहे लोगों के लिए भावनात्मक और मानसिक समर्थन को शामिल करती है। उन्होंने "दया धर्म का मूल है, पाप मूल अभिमान" के सिद्धांत पर जोर दिया, प्रतिभागियों से सभी के लिए सकारात्मक विचारों और शुभकामनाओं को विकसित करने का आग्रह किया।

अनुसूइया दीदी ने पारस्परिकता के सिद्धांत पर विस्तार से बताया, यह समझाते हुए कि हमारे कार्य, शब्द और यहां तक कि विचार भी एक लहर प्रभाव पैदा करते हैं, अंततः हमारे पास लौट आते हैं। उन्होंने श्रोताओं को दयालुता के कार्यों को दान के रूप में नहीं, बल्कि अपनी भलाई में निवेश के रूप में देखने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने सर्वोच्च आत्मा की संतान के रूप में सभी आत्माओं से जुड़ी आत्मा के रूप में स्वयं की ब्रह्मा कुमारियों की समझ पर प्रकाश डाला, सार्वभौमिक भाईचारे की भावना को बढ़ावा दिया।राष्ट्रीय प्रेस दिवस को स्वीकार किया गया।

जीवन की जटिलताओं और राजनीति की भूमिका को संबोधित करना:

कार्यक्रम में प्रतिभागियों के चुनौतीपूर्ण प्रश्नों का समाधान किया गया, जिसमें ऐसी दुनिया में करुणा का विरोधाभास भी शामिल है जहाँ जीवित रहने के लिए उपभोग आवश्यक है। आचार्य जी ने मानव निर्मित कानूनों और अस्तित्व के अंतर्निहित कानूनों के बीच अंतर को स्पष्ट किया, एक मार्गदर्शक सिद्धांत के रूप में "समझ" के महत्व पर जोर दिया। दीदी ने जीवन और मृत्यु के प्रश्न को संबोधित किया, आत्मा की शाश्वत प्रकृति और हमारी आध्यात्मिक पहचान को पहचानने की परिवर्तनकारी शक्ति पर प्रकाश डाला।

एक प्रतिभागी ने  जीवन में राजनीतिक जुड़ाव का प्रश्न उठाया। वक्ताओं ने ने व्यक्तिगत जिम्मेदारी और आत्म-सुधार पर सर्वोपरि जोर दिया, यह सुझाव देते हुए कि सकारात्मक परिवर्तन व्यक्ति के भीतर से शुरू होता है। आचार्य प्रेम भाटिया ने इस भावना को प्रतिध्वनित किया, एक बुद्धिमान व्यक्ति को अपने भीतर संतुष्ट व्यक्ति के रूप में परिभाषित किया, जिसके विचार, समझ और कार्य संरेखित हैं.

सामुदायिक जुड़ाव और भविष्य की पहल:

प्रसारण में सामुदायिक जुड़ाव के लिए आरजेएस पीबीएच की प्रतिबद्धता पर प्रकाश डाला गया, जिसमें राजेंद्र सिंह कुशवाहा जी की उनके गाँव की यात्रा की घोषणा की गई। अंतर्राष्ट्रीय सहिष्णुता दिवस और राष्ट्रीय प्रेस दिवस पर 16 नवंबर को माता रामरती देवी मंदिर कृषक प्रयोगशाला एवं कृषक पर्यटन स्थल के सहयोग से आयोजित वेबिनार में ब्रह्माकुमारीज संस्थान के बीके सुशांत भाई आस्ट्रेलिया की डॉ. श्वेता गोयल का स्वागत सह-आयोजक राजेन्द्र सिंह कुशवाहा करेंगे। श्री मन्ना ने बताया कि 15 व 19 जनवरी 2025 को दिल्ली में क्रमशः प्रवासी दिवस मीडिया कांफ्रेंस व अंतर्राज्यीय प्रवासी भारतीय दिवस समारोह आयोजित किया जाएगा।
, और सुरजीत सिंह दीदेवार ने प्रतिभागियों को "दर्शन" पर एक वेबिनार में रविवार 17 नवंबर को आमंत्रित किया । सोमवार 18 नवंबर को आरजेएस युवा टोली,पटना के सदस्यों को सम्मानित करने के लिए 10 नवंबर 2024 को उदय-बिन्दा मन्ना की दिल्ली से पटना की आशीर्वाद यात्रा की घोषणा की गई। 
आरजेएस पीबीएच के प्रेरणास्रोत श्री राम जग सिंह और श्रीमती 
कार्यक्रम के अंत में बीके अनुसूया दीदी के नेतृत्व में एक निर्देशित(राजयोग ध्यान ने चर्चा किए गए सिद्धांतों का व्यावहारिक अनुप्रयोग प्रदान किया, प्रतिभागियों को अपने आंतरिक स्व और परमात्मा से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित किया।

दार्शनिक प्रवचन और व्यावहारिक सलाह से भरपूर, यह प्रसारण करुणा, समझ और व्यक्तिगत जिम्मेदारी की परिवर्तनकारी शक्ति का एक शक्तिशाली अनुस्मारक के रूप में कार्य करता है। आरजेएस पीबीएच एक अधिक दयालु और परस्पर जुड़ी दुनिया की ओर मार्ग को रोशन करते हुए सकारात्मकता के प्रतीक के रूप में चमकता रहता है। रितु कपिल टेकरा के भक्ति गीत ने शांति और आध्यात्मिक सद्भाव के समग्र संदेश के साथ प्रतिध्वनित किया I
 

आकांक्षा 
हेड‌ क्रिएटिव टीम 
आरजेएस पीबीएच 
8368626368

 









प्रेस विज्ञप्ति3/11/2024

आरजेएस पीबीएच द्वारा दैनिक साईं मीडिया के सहयोग से बायोस्फीयर रिजर्व दिवस मनाया गया ।

आरजेएशिएन्स द्वारा पर्यावरण संरक्षण के लिए बलिदान माता अमृता देवी विश्नोई को श्रद्धांजलि दी गई 
नई दिल्ली। प्रकृति,पर्यावरण जैव-विविधता और जल-जंगल-जमीन और पहाड़ के संरक्षण के लिए 
यूनेस्को द्वारा घोषित तीन नवंबर 2024 को अंतर्राष्ट्रीय बायोस्फीयर रिजर्व दिवस मनाया गया।
कार्यक्रम में पर्यावरणविदों ने बताया कि बायोस्फियर रिज़र्व सतत विकास के प्रेरक स्थान होते हैं । इसके अंतर्गत स्थलीय ,समुद्रीय और तटीय पारिस्थितिकी तंत्र और जैव विविधता के संरक्षण को भी शामिल किया जाता है ।राम-जानकी संस्थान पाॅजिटिव ब्राॅडकास्टिंग हाउस (आरजेएस पीबीएच) के संस्थापक व राष्ट्रीय संयोजक उदय कुमार मन्ना 
के संयोजन और संचालन में दैनिक साईं मीडिया के सहयोग से अंतर्राष्ट्रीय बायोस्फीयर रिजर्व दिवस तीन नवंबर 2024 को मनाया गया। सह-आयोजक साईं मीडिया के संस्थापक व संपादक पीतम सिंह ने मुख्य अतिथि आहर पाइन बचाओ अभियान के संयोजक मुनीश्वर प्रसाद सिन्हा और अतिथि वक्ता दिल्ली विश्वविद्यालय के फिल्ड बायोलॉजिस्ट दिबानिक मुखर्जी और हरमीक सिंह का स्वागत करते हुए कहा कि इस दिवस की स्थापना बायोस्फीयर रिजर्व की भूमिका को बढ़ावा देने,सतत विकास और इन क्षेत्रों में और इसके आसपास रहने वाले समुदायों की भलाई के लिए की गई थी।
पर्यावरण संरक्षण के लिए 12 सितंबर 1730 में खेजड़ली गांव की माता अमृता देवी विश्नोई को पर्यावरणविद् आरके विश्नोई ने आरजेएस पीबीएच परिवार की ओर से श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि विश्नोई समाज पशुओं, जीव-जंतुओं और पेड़ों की रक्षा करने के लिए जाम्भोजी महाराज के नियमों का पालन करते हैं।
श्री मुनीश्वर प्रसाद सिन्हा ने कहा कि गोवर्धन, पूजा, दावात पूजा, सरस्वती पूजा और महापर्व छठ पूजा आदि सभी प्रकृति पूजा और संरक्षण से जुड़े पर्व- त्यौहार हैं। बीते जमाने का ढोलहा पीटना जल चौपाल की याद दिलाता है, जिसमें चर्चा होती थी कि जलस्रोतों को कैसे बचाना है। उन्होंने आहर पाइन बचाओ अभियान और श्रमदान प्रथा से युवाओं को जोड़कर पर्यावरण संरक्षण का प्रयोग और प्रयास किया।
श्री दिबानिक मुखर्जी ने कहा कि बायोस्फीयर रिजर्व,जैव विविधता हॉटस्पॉट की रक्षा करने और संधारणीय संसाधन उपयोग को बढ़ावा देने के लिए नामित क्षेत्र हैं। 
विभिन्न पारिस्थितिकी प्रणालियों का अनुभव करने और आर्द्रभूमि, रेंजलैंड और विविध प्रजातियों को आकर्षित करने के माध्यम से जैव विविधता के प्रबंधन के बारे में जानने के लिए बायोस्फीयर रिजर्व का दौरा करने का प्रस्ताव दिया है, जो अनिवार्य रूप से यमुना नदी के किनारे एक मिनी बायोस्फीयर रिजर्व बना रहा है।
श्री हरमीक सिंह जैव विविधता की अवधारणा को समझाते हैं, जिसमें मनुष्यों के बीच आनुवंशिक विविधता और पौधों और जानवरों में परिवर्तनशीलता शामिल है। वह पूरी आबादी पर बीमारियों या संक्रमण के प्रभाव को रोकने के लिए जैव विविधता को बनाए रखने के महत्व पर प्रकाश डालते हैं। उदय मन्ना ने जैव विविधता पार्कों पर चर्चा को केंद्रित करने और आरजेएस जैसे सकारात्मक मीडिया को शामिल करने का सुझाव दिया।
बैठक में बायोस्फीयर रिजर्व की अवधारणा, स्वदेशी ज्ञान और संस्कृति को संरक्षित करने के महत्व, तथा कार्बन उत्सर्जन को कम करने और वनों की रक्षा के लिए जन जागरूकता और व्यक्तिगत प्रयासों की आवश्यकता पर ध्यान केंद्रित किया गया। चर्चा में जैव विविधता को बनाए रखने, संरक्षण प्रयासों और क्षेत्र में सतत विकास के महत्व को भी शामिल किया गया, साथ ही पर्यावरण जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए एक राष्ट्रव्यापी नेटवर्क बनाने की योजना भी शामिल की गई। 

आकांक्षा 
हेड‌ क्रिएटिव टीम 
आरजेएस पीबीएच 
8368626368

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