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आरजेएस पाॅजिटिव मीडिया  रक्तदान जागरूकता तेज करेगा और शाकाहार आंदोलन में न्यू डायट सिस्टम पर
जोर देगा. ऑब्जर्वर दीप माथुर ने मासिक न्यूज लेटर का विमोचन किया और कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डा.वनश्री सिंह और अध्यक्ष बी वी चौहान के संबोधन से सकारात्मक आंदोलन से जुड़े लोगों को नई ऊर्जा मिली।    #rjspositivemedia
राष्ट्रीय एकता दिवस पर सरदार पटेल व रेडक्रॉस के 
संस्थापक हेनरी डूनंट को आरजेसियंस ने दी श्रद्धांजलि. 
दिल्ली।‌ राष्ट्रीय एकता दिवस पर 31 अक्टूबर 2026 को स्वास्थ्य के लिए शाकाहार और मानवता के लिए रक्त दान विषय पर राम-जानकी संस्थान पाॅजिटिव ब्राॅडकास्टिंग हाउस(आरजेएस पीबीएच)व  आरजेएस पाज़िटिव मीडिया के संस्थापक व राष्ट्रीय संयोजक उदय‌ कुमार मन्ना ने 685वें कार्यक्रम का आयोजन और संचालन किया किया।
 ओपनिंग रिमार्क्स में आरजेएस पाॅजिटिव मीडिया के राष्ट्रीय ऑब्जर्वर दीप माथुर ने आरजेएस परिवार की ओर से सरदार पटेल की 151वीं जयंती 31 अक्टूबर व रेडक्रॉस के 
संस्थापक हेनरी डूनंट की पुण्यतिथि 30 अक्टूबर के उपलक्ष्य श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि आनेवाले दिनों में शाकाहार आंदोलन और रक्तदान जागरूकता अभियान को तेज किया जाएगा। इस अवसर पर आरजेएस के मासिक न्यूज लेटर "पाॅजिटिव मीडिया" का विमोचन किया और कहा कि सकारात्मक आंदोलन के देश विदेश में आयोजित महीने भर की आरजेएस गतिविधियों को इसमें शामिल कर दस्तावेजीकरण किया जाता है। 
एनडीएस, न्यू डायट सिस्टम के  उचाना,जिंद हरियाणा शाखा प्रभारी दम्पति सतीश जांगड़ा और सुमन जांगड़ा  ने कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने हाल ही में एनडीएस के संस्थापक बी वी चौहान की प्रेरणा से दिल्ली में 24 से 26 अक्टूबर को आयोजित एनडीएस हैल्थ  कैंप पर प्रकाश डाला। 
 मुख्य अतिथि इंडियन रेडक्रॉस सोसायटी राष्ट्रीय मुख्यालय की संयुक्त सचिव और ब्लड सेंटर की प्रभारी डा.वनश्री सिंह ने भारत में हर साल करीब 15 लाख यूनिट रक्त की कमी को दूर करने के लिए  नागरिक संगठनों से जागरूकता अभियान तेज करने की अपील की । उन्होंने कहा कि आरजेएस परिवार के रक्त दान जागरूकता के संकल्प लेने‌‌ के तीस दिन में आरजेएस के प्रचार से कुछ रक्तदान शिविर आयोजित करने में मदद मिली है,इसे और तेज करने की जरूरत है।देश में हर साल बुनियादी चिकित्सा जरूरतों को पूरा करने के लिए 1.5 करोड़ यूनिट रक्त की आवश्यकता होती है और  वर्तमान में  इसमें कमी है।। ये कहना था मुख्य अतिथि डॉ. वनश्री सिंह ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार किसी भी देश को अपनी कुल आबादी के कम से कम एक प्रतिशत के बराबर रक्त एकत्र करना चाहिए। 
वेबिनार की अध्यक्षता कर रहे गुजरात के 80 वर्षीय पूर्व इंजीनियर तथा न्यू डाइट सिस्टम के संस्थापक बी.वी. चौहान ने उपवास, आंतों की सफाई और प्राकृतिक कच्चे आहार पर आधारित स्वास्थ्य दर्शन प्रस्तुत किया। पिछले 34 वर्षों से केवल कच्चे फलाहार पर जीवन व्यतीत कर रहे चौहान ने कहा कि आधुनिक जीवनशैली से जुड़े अधिकांश रोग अप्राकृतिक भोजन, दूध व डेयरी उत्पादों के सेवन, पके हुए अनाज और शरीर में जमा गंदगी के कारण होते हैं।चौहान ने दैनिक जीवन के लिए तीन चरणों वाली सफाई पद्धति का विवरण दिया। इसमें सुबह उठते ही संजीवनी क्रिया यानी सादे पानी से एनिमा के जरिए बड़ी आंत की सफाई करना, उसके बाद लगातार आठ घंटे तक बिना अन्न-जल के पूर्ण उपवास रखना जिसे उन्होंने एयर फास्टिंग कहा, और उपवास तोड़ने पर आंवला, मोरिंगा, अनार के छिलके या करेले का डिटॉक्स जूस लेना शामिल है। इसके बाद दोपहर से रात तक मौसमी फल, कच्ची सब्जियां और जूस का सेवन करने तथा रात को सोने से पहले पुनः एनिमा करने का सुझाव दिया गया। उन्होंने पके हुए भोजन, पशुजन्य दूध, दालों, अनाज और नमक से परहेज करने की सलाह दी।

डॉ. वनश्री सिंह ने कहा कि जब अस्पतालों में रक्त की कमी होती है, तो इसका सबसे गंभीर असर थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों पर पड़ता है, जिन्हें हर पंद्रह दिन में रक्त चढ़ाने की जरूरत होती है। इसके अलावा नियमित डायलिसिस कराने वाले मरीजों, कैंसर रोगियों और प्रसव के दौरान गंभीर जटिलताओं का सामना करने वाली महिलाओं को समय पर रक्त न मिलने से जीवन का संकट खड़ा हो जाता है। उन्होंने कहा कि स्वैच्छिक रक्तदान से ब्लड बैंकों में सुरक्षित भंडार तैयार होता है, जिससे ऐसे जरूरतमंद मरीजों की जान बचाई जा सकती है जिनके पास रक्तदान करने वाला कोई परिजन नहीं होता।

रक्तदान से जुड़ी भ्रांतियों का निवारण करते हुए डॉ. सिंह ने स्पष्ट किया कि रक्तदान करने से शरीर में कोई कमजोरी या दर्द नहीं होता। स्वस्थ पुरुष प्रत्येक तीन महीने में और स्वस्थ महिलाएं प्रत्येक चार महीने में नियमित रक्तदान कर सकती हैं। अधिकृत ब्लड बैंक रक्तदाताओं को डोनर कार्ड उपलब्ध कराते हैं, जिसके आधार पर एक वर्ष के भीतर डोनर या उसके परिवार के किसी सदस्य को जरूरत पड़ने पर आसानी से रक्त उपलब्ध कराया जाता है। उन्होंने युवाओं और विद्यार्थियों में रक्तदान की आदत विकसित करने के लिए स्कूलों और कॉलेजों में जागरूकता अभियान बढ़ाने पर जोर दिया।

रेड क्रॉस के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए डॉ. वनश्री सिंह ने बताया कि स्विट्जरलैंड के व्यवसायी और सामाजिक कार्यकर्ता हेनरी ड्यूनेंट ने उत्तरी इटली में सोलफेरिनो के युद्ध में घायल सैनिकों की दुर्दशा देखकर बिना किसी भेदभाव के प्राथमिक चिकित्सा सहायता शुरू की थी। ड्यूनेंट के प्रयासों से ही इंटरनेशनल कमेटी ऑफ द रेड क्रॉस की स्थापना हुई, जिनेवा कन्वेंशन बना और 1901 में उन्हें विश्व का पहला नोबेल शांति पुरस्कार प्रदान किया गया। उन्होंने कहा कि मानवता की सेवा और निष्पक्षता का यही सिद्धांत स्वैच्छिक रक्तदान की भी मूल आत्मा है।
बी वी चौहान ने दैनिक जीवन के लिए तीन चरणों वाली सफाई पद्धति का विवरण दिया। इसमें सुबह उठते ही संजीवनी क्रिया यानी सादे पानी से एनिमा के जरिए बड़ी आंत की सफाई करना, उसके बाद लगातार आठ घंटे तक बिना अन्न-जल के पूर्ण उपवास रखना जिसे उन्होंने एयर फास्टिंग कहा, और उपवास तोड़ने पर आंवला, मोरिंगा, अनार के छिलके या करेले का डिटॉक्स जूस लेना शामिल है। इसके बाद दोपहर से रात तक मौसमी फल, कच्ची सब्जियां और जूस का सेवन करने तथा रात को सोने से पहले पुनः एनिमा करने का सुझाव दिया गया। उन्होंने पके हुए भोजन, पशुजन्य दूध, दालों, अनाज और नमक से परहेज करने की सलाह दी।

सत्र के दौरान उपस्थित प्रतिभागियों ने व्यावहारिक और चिकित्सीय पहलुओं पर कई सवाल पूछे। आरजेएस पॉजिटिव मीडिया के राष्ट्रीय ऑब्जर्वर दीप माथुर ने सवाल उठाया कि लंबे समय तक पूरी तरह से प्लांट-बेस्ड और कच्चे आहार पर रहने से क्या शरीर में विटामिन बी12, हीमोग्लोबिन या आवश्यक प्रोटीन की कमी हो सकती है, और क्या पके भोजन के आदी लोगों को अचानक बदलाव करना चाहिए।

जवाब में बी.वी. चौहान ने कहा कि प्रकृति द्वारा निर्मित प्राकृतिक आहार में सभी आवश्यक तत्व मौजूद होते हैं और शरीर अपनी जरूरत के अनुसार पोषण का संतुलन बना लेता है। उन्होंने माना कि खानपान में अचानक बदलाव करने से शरीर पर दबाव पड़ सकता है, इसलिए धीरे-धीरे पके भोजन की मात्रा कम करते हुए कच्चे आहार की ओर बढ़ना चाहिए। बिहार के लखीसराय से जुड़े गोविंद कुमार द्वारा शरीर में गांठ की समस्या से पीड़ित 18 वर्षीय किशोरी के आहार के संबंध में पूछे गए सवाल पर चौहान ने बताया कि फल चबाकर खाना और ताजा जूस दोनों ही समान रूप से लाभकारी हैं। उन्होंने कहा कि जब तक पूरी तरह कच्चा आहार संभव न हो, तब तक थाली में 70 प्रतिशत उबली या हल्की पकी सब्जियां और बहुत कम अनाज लेना चाहिए।

लंदन से जुड़े कमलेश वाजिद ने गेहूं और चावल के विकल्प के रूप में बाजरा, ज्वार और रागी जैसे मोटे अनाजों के उपयोग पर सवाल किया। चौहान ने स्पष्ट किया कि हालांकि मोटे अनाज गेहूं और चावल की तुलना में कम चिपचिपे होते हैं और कम नुकसान पहुंचाते हैं, लेकिन स्वास्थ्य की दृष्टि से कच्चा प्राकृतिक भोजन ही सर्वोत्तम है। वडोदरा के संदीप सोलंकी ने बताया कि जनवरी 2025 से इस पद्धति को अपनाकर उन्होंने अपना वजन घटाया और पथरी बाहर निकाली, लेकिन बाईं तरफ शरीर में दर्द बना रहता है। चौहान ने सुझाव दिया कि यह समस्या खानपान से जुड़ी होने के बजाय गलत मुद्रा या नस दबने के कारण हो सकती है, जिसकी जांच हड्डी या फिजियोथेरेपी के जानकारों से करानी चाहिए।

दिल्ली के अरविंद सिंह ने बताया कि दिल्ली और पंजाब के गुरुद्वारों में न्यू डाइट सिस्टम के शिविरों को भारी जनसमर्थन मिला है और दिसंबर के अंतिम सप्ताह में दिल्ली में नए शिविर आयोजित किए जाएंगे। उचाना, जींद के सतीश जांगड़ा और सुमन जांगड़ा ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि तीन साल पहले इस एनडीएस के  प्राकृतिक जीवनशैली को अपनाकर सुमन ने घुटने के ऑपरेशन के बिना गंभीर जोड़ों के दर्द और कैल्शियम की कमी से पूरी तरह मुक्ति पाई।

आरजेएस पॉजिटिव मीडिया के संस्थापक व राष्ट्रीय संयोजक उदय कुमार मन्ना ने बताया कि इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी के साथ मिलकर शुरू किया गया स्वैच्छिक रक्तदान जागरूकता संकल्प 31 दिसंबर 2026 तक निरंतर चलेगा। इसके समापन पर नई दिल्ली के संसद मार्ग स्थित रेड क्रॉस राष्ट्रीय मुख्यालय में उत्कृष्ट सेवा देने वाले स्वयंसेवकों को प्रमाण पत्र प्रदान किए जाएंगे।

श्री मन्ना ने कहा कि 2047 तक चलने वाले आरजेएस संगठन के विस्तृत रोडमैप की जानकारी देते हुए बताया कि 7 से 26 जनवरी 2027 तक प्रवासी भारतीय दिवस और गणतंत्र दिवस के उपलक्ष्य में 20 दिवसीय सतत जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त 12 से 14 फरवरी 2027 को नोएडा फिल्म सिटी स्थित मारवाह स्टूडियोज में एशियन एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलीविजन के अध्यक्ष डॉ. संदीप मारवाह की अध्यक्षता में आयोजित होने वाले 15वें ग्लोबल फेस्टिवल ऑफ जर्नलिज्म में आरजेएस परिवार  करूणामयी पत्रकारिता से जागरूक भारत @2047 विषय पर कार्यक्रम करेगा जिसमें नेशनल वेज प्लेज का संकल्प लिया जाएगा।
 उन्होंने बताया कि संगठन 2027 की शुरुआत में अपनी आठवीं पुस्तक, स्वतंत्रता दिवस 2027 पर नौवीं पुस्तक और 2028 के गणतंत्र दिवस तक 1,000 कार्यक्रम पूरे होने पर अपनी दसवीं पुस्तक प्रकाशित करेगा।


उदय मन्ना 
8368626368

कच्चा खाना, सेहत का खज़ाना है  - न्यू डायट सिस्टम, NDS दिल्ली हैल्थ कैंप (आयोजक: सतीश जांगड़ा-सुमन जांगड़ा) AKSBU- 682
 
एनडीएस , न्यू डायट सिस्टम पर तीन दिवसीय 24 -26 अक्टूबर 2026 हैल्थ कैंप, दिल्ली के महाराजा अग्रसेन भवन, त्रिनगर में आयोजित किया गया। शिविर के आयोजक उचाना मंडी (जींद, हरियाणा) के निवासी सतीश जांगड़ा बताते हैं कि लगभग 3 साल पहले उनकी पत्नी सुमन काफी गंभीर बीमारियों से जूझ रही थीं।
उन्हें टाइफाइड के बाद कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं शुरू हुईं, जिनमें हार्ट की समस्या, सोरायसिस (चर्म रोग) और शुगर (ब्लड शुगर स्तर 600 तक पहुंच जाना) शामिल थीं ।
उन्होंने जींद में आयोजित NDS (New Diet System) शिविर में भाग लिया और उसी दिन से दवाइयां छोड़ दीं। 3 वर्षों में लगभग 90% तक स्वास्थ्य में सुधार आया ।
2. न्यू डाइट सिस्टम (NDS) क्या है? 
NDS का अर्थ नेचुरल डाइट सिस्टम है, जिसमें प्रकृति द्वारा प्रदत्त प्राकृतिक भोजन (फल, कच्ची सब्जियां, पत्तियां) बिना पकाए और बिना किसी प्रोसेस के ग्रहण किया जाता है।
इसकी शुरुआत गुजरात के श्री बी. वी. चौहान जी द्वारा की गई थी। वह पिछले 30–35 वर्षों से केवल फलाहार पर हैं और 80 वर्ष की उम्र में भी पूरी तरह स्वस्थ हैं ।
3. मुख्य वक्ता सुमन जांगड़ा का अनुभव 
सुमन जी ने बताया कि शिविर में जाने पर उन्हें खान-पान में बदलाव के बारे में बताया गया।
शुरुआती 5 दिनों के अंदर ही उनका बीपी और शुगर काफी हद तक नियंत्रित होने लगा ।
6 महीने तक इसे सख्ती से अपनाने पर शरीर के सभी अंगों (Organs) की रिकवरी हुई और वह दवाओं से पूरी तरह मुक्त हो गईं ।
4. NDS का डाइट प्लान और ग्रीन जूस बनाने की विधि 
ग्रीन जूस (Green Juice) की सामग्री :
पालक, पुदीना, धनिया, अदरक, आंवला, लौकी, सहजन (मोरिंगा) के पत्ते, कड़ी पत्ता, तुलसी के पत्ते, नींबू और कोई भी मौसमी फल।
इसे मिक्सी में थोड़ा पानी मिलाकर पीसा जाता है, फिर छानकर स्वादानुसार हल्का नमक डालकर पिया जाता है।
दैनिक आहार दिनचर्या (पंचतत्व आधारित):
सुबह (नाश्ता): कोई नाश्ता नहीं दिया जाता; निर्जला/उपवास (फास्टिंग) रखा जाता है, जिससे शरीर को आकाश तत्व मिलता है ।
सुबह 11:00 बजे: ग्रीन जूस दिया जाता है, जो पत्तियों से वायु तत्व प्रदान करता है ।
दोपहर (लंच): विभिन्न प्रकार के मौसमी फल और चटनियां दी जाती हैं, जिससे शरीर को अग्नि तत्व मिलता है और पाचन सुचारू होता है।
शाम/रात (डिनर): कच्ची सब्जियों के सलाद और तरह-तरह की चटनियां (खट्टी-मीठी व हरी चटनी) दी जाती हैं, जिससे जल तत्व मिलता है ।
5. शिविरों का आयोजन और भविष्य की योजना 
दंपत्ति ने बताया कि अब तक ऑनलाइन माध्यमों और विभिन्न शिविरों के जरिए लगभग एक से डेढ़ लाख लोग इस डाइट पद्धति से लाभान्वित हो चुके हैं ।
हरियाणा के उचाना, हिसार, जींद, कुरुक्षेत्र और दिल्ली के मुंडका व त्रिनगर में इनके शिविर आयोजित किए गए हैं ।
सतीश जी ने स्पष्ट किया कि जो लोग गंभीर रूप से बीमार हैं, उनके लिए फास्टिंग अधिक जरूरी है, जबकि सामान्य लोग इसे अपनी सुविधानुसार जीवनशैली का हिस्सा बना सकते हैं।
उन्होंने बताया कि नवंबर के अंत में दिल्ली में एक और बड़ा स्वास्थ्य शिविर आयोजित करने की योजना है ।
RJS POSITIVE MEDIA YouTube पर वीडियो देखें:

https://youtu.be/nKItdfBcbPw?si=DGL6GPJqTmDloTOT

 "NDS न्यू डायट सिस्टम पर है लोगों को है विश्वास.
 "आहार में बदलाव तो स्वास्थ्य में सुधार"
दिल्ली हैल्थकैंप | AKSBU- 682
 त्रिनगर (नई दिल्ली) के महाराजा अग्रसेन भवन में आयोजित एनडीएस (New Diet System) डायट सिस्टम के तीन दिवसीय स्वास्थ्य शिविर पर आधारित है। इसमें आयोजकों, प्रशिक्षकों और प्रतिभागियों ने अपने अनुभव व एनडीएस के सिद्धांतों को साझा किया है।
वीडियो का विस्तृत विवरण व मुख्य बिंदु
1. एनडीएस (New Diet System) की मूल कार्यप्रणाली
उपवास (निर्जला फास्टिंग): सुबह उठने से लेकर दोपहर 12 बजे तक बिना पानी व भोजन के निर्जला उपवास रखा जाता है, जिससे शरीर का 'आकाश तत्व' सक्रिय होकर आंतरिक सफाई करता है ।
एनिमा (आंतों की सफाई): सुबह-शाम हल्के पानी से एनिमा लेने की सलाह दी जाती है, जिससे बड़ी आंत में जमा पुराना मल व टॉक्सिन्स बाहर निकल जाते हैं ।
ग्रीन जूस (अमृत जूस): दोपहर 12 बजे धनिया, पुदीना, पालक, करी पत्ता, सहजन और आंवले का हरा रस लिया जाता है (वायु तत्व) ।
कच्चा आहार (रॉ डाइट): दोपहर और शाम को केवल मौसमी फल (अग्नि तत्व), कच्ची सब्जियां/सलाद (जल तत्व) और मेवे खाए जाते हैं। पका हुआ भोजन, तेल, मसाले, नमक (सामान्य) और गैस के उपयोग को बंद या बेहद सीमित किया जाता है ।
दूध व डेयरी उत्पादों का पूर्ण त्याग: एनडीएस में दूध, दही, पनीर व मांसाहार को पूरी तरह वर्जित माना गया है, क्योंकि इन्हें शरीर में कफ, पित्त, टॉक्सिन और गंभीर बीमारियों की मुख्य वजह बताया गया है ।
2. प्रमुख प्रतिभागियों व वक्ताओं के अनुभव
राज सिंह यादव (बहादुरगढ़):
वर्ष 2004 से अनियंत्रित डायबिटीज (शुगर लेवल 350–450) और त्वचा की गंभीर एलर्जी से पीड़ित थे ।
एनडीएस अपनाने के बाद दवाइयां बंद हो गईं और ब्लड शुगर स्तर 90–125 के बीच सामान्य हो गया ।
सत्यनारायण दलाल (बहादुरगढ़):
पिछले 8 महीनों से एनडीएस का पालन कर रहे हैं। 30 साल पुराना नजला, थायराइड और डायबिटीज की समस्या जड़ से समाप्त होने का दावा किया ।
सीए सुनील कुमार गुप्ता (दिल्ली):
पिछले 20 वर्षों से बीपी, थायराइड, कोलेस्ट्रॉल और गंभीर डायबिटीज से जूझ रहे थे और रोजाना इंसुलिन व मुट्ठी भर दवाइयां लेते थे ।
7 अगस्त 2020 को एनडीएस से जुड़े और पिछले 6 वर्षों से उनकी सभी दवाइयां व इंसुलिन बंद हैं ।
उन्होंने पंचतत्वों (आकाश, वायु, अग्नि, जल, पृथ्वी) के आधार पर प्राकृतिक कच्चे भोजन और श्रीमद्भगवद्गीता के 17वें अध्याय के अनुसार 'रसयुक्त सात्विक आहार' का वैज्ञानिक व आध्यात्मिक महत्व समझाया ।
मोहन रवि (उम्र 70 वर्ष, करोल बाग):
25 वर्षों से डायबिटीज के मरीज थे। कैंप में आने के बाद एनिमा व कच्चे फल-आहार और 18 घंटे के उपवास के जरिए बिना दवा के उनका शुगर लेवल 381 से घटकर 105 पर आ गया ।
सीमा सांगवान (लक्ष्मी नगर, दिल्ली):
650 शुगर लेवल रहता था। कैंप में बिना पके स्वादिष्ट कच्चे व्यंजन (जैसे कच्चे केले की सब्जी, खजूर की चटनी, पोहा व सलाद) खाने के बाद ऊर्जावान महसूस किया ।
बीके दीपक (युवा साधक):
2020 से बी.वी. चौहान जी के मार्गदर्शन में एनडीएस अपना रहे हैं। उन्होंने युवाओं में खराब जीवनशैली के दुष्प्रभावों और कच्चे प्राकृतिक भोजन द्वारा शरीर की प्राकृतिक डिटॉक्सिफिकेशन (ऑटोफैगी) प्रणाली के बारे में बताया ।
मनप्रीत कौर (अमृतसर):
एनडीएस अपनाकर अपना वजन 110 किलोग्राम से घटाकर 74 किलोग्राम किया ।
उन्होंने महिलाओं और गृहिणियों के लिए रसोई में बिना गैस जलाए कच्ची सब्जियों, मखाने, स्मूदी और ग्रीन जूस से संपूर्ण व पौष्टिक थाली तैयार करने के तरीके साझा किए ।
निष्कर्ष
पूरे वीडियो में यह संदेश दिया गया है कि भोजन पकाने से उसके प्राकृतिक पोषक तत्व और जीवन रस नष्ट हो जाते हैं। केवल प्राकृतिक, मौसमी और कच्चा आहार (फल, पत्तियां, सब्जियां) अपनाकर तथा आंतों की समय पर सफाई करके डायबिटीज, बीपी, थायराइड और मोटापे जैसी जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों से बिना दवा के राहत पाई जा सकती है ।
Video Link RJS POSITIVE MEDIA.
https://youtu.be/pGwM7w7hr-c?si=k_TM2kNTRmOsiXUJ
RJS POSITIVE MEDIA , Delhi.
M.8368626368.

NDS Uchana brings diet best 3 day healing camp from 24th October at  Agrasen Bhavan tri Nagar Delhi.

 NDS UCHANA Of Raw Diet System Announce Three-Day Health Detox Camp at Agrasen Bhavan Trinagar Delhi.

NEW DELHI
Organizers of the New Diet System, an alternative lifestyle initiative promoting raw plant-based nutrition and digestive detoxification, have announced a three-day health camp at Agarsen Bhavan, Trinagar Near Indralok Metro station,Delhi scheduled to run from October 24 to October 26, 2026. 
Registrations for the three-day Delhi camp are currently being accepted through the organizers at Uchana Mandi, Haryana.Interested may contact at 9466318750.

The event, which offers both day-boarding and residential facilities for outstation participants, will take place at Agrasen Bhawan near the Inderlok metro station in the Srinagar locality of the capital. The camp can accommodate up to one hundred attendees, with between sixty and seventy people expected to participate, according to camp coordinator Satish Jangra.

The announcement was made during the 673rd virtual meeting hosted by RJS Positive Media and Ramjanki Sansthan Positive Broadcasting House. The session formed part of an ongoing public awareness campaign on vegetarianism and lifestyle disease prevention led by national convener Uday Kumar Manna.

Suman Jangra, who heads an NDS detox center near the new bus stand in Uchana Mandi in Haryana's Jind district, outlined the core principles of the dietary regimen. She stated that her center was established after she successfully resolved personal health conditions, including chronic high blood pressure and elevated blood sugar levels, through a five-day camp in Jind three years ago. Over the past two years, the Uchana facility has offered guided nutritional regimens to local visitors and out-of-town guests.

Explaining the methodology, Suman Jangra argued that most modern lifestyle illnesses stem from digestive congestion caused by repeatedly eating processed, heavily spiced, and cooked meals. Under the system, participants consume raw vegetable preparations, salads, fresh fruits, and nutrient-dense green juices prepared from ingredients such as spinach, coriander, mint, moringa, ginger, and tulsi. The program also discourages the intake of commercial dairy products, advising people to replace milk and cottage cheese with homemade plant-based alternatives derived from coconut, peanuts, soybeans, or sesame seeds.

According to Suman Jangra, uncooked plant matter digests within ninety minutes, whereas conventional cooked meals require six to seven hours to break down. She maintained that allowing the digestive tract extended resting periods and removing dietary toxins assists the body in managing disorders ranging from obesity to joint pain.

Several beneficiaries shared their experiences during the briefing. Sunita Rani, an inspector with the Haryana Cooperative Department currently stationed at Narwana, reported that long-term gastrointestinal complications, severe joint pain, and other recurring ailments showed significant reduction after she adopted a raw diet and daily green juices under the center's guidance. Manpreet Kaur of Amritsar recounted losing over thirty kilograms after transitioning to the routine, noting improved daily stamina. Another participant, Nikhil, described how incorporating raw green extracts and cold-prepared meals eliminated persistent food cravings and reduced physical fatigue. Acharya Suryadev Arya, a former government yoga instructor in Haryana, affirmed that his family adopted the regimen after his wife experienced relief from chronic health issues at the Uchana center.

Addressing the gathering from the United States, Dr. Ramaiah Muthyala, a chemical researcher working on rare diseases who has resided in America for fifty-four years, offered his observations on vegetarian nutrition. Muthyala observed that meat production requires substantially greater inputs of water and energy per kilogram compared to plant cultivation. At the same time, he voiced concern over the extensive use of chemical pesticides in contemporary farming, urging Indian agricultural practices to prioritize uncontaminated produce to preserve long-term public health.

The virtual program also referenced upcoming cultural and social initiatives planned by RJS Positive Media, including a fifteen-day international convention scheduled for January in the National Capital Region. Organizers indicated that the broader campaign aims to link plant-based eating, animal welfare, and environmental conservation.

प्राकृतिक आहार प्रणाली एनडीएस डिटाॅक्स सेंटर, उचाना का दिल्ली में तीन दिन के स्वास्थ्य शिविर की घोषणा, पंजीकरण प्रारंभ.    #rjspositivemedia
प्राकृतिक व सात्विक आहार से आंतरिक शारीरिक शुद्धि व स्वास्थ्य के लिए 24 अक्टूबर से लगेगा एनडीएस का दिल्ली में आवासीय शिविर 

नई दिल्ली.
कच्चे प्राकृतिक आहार और आंतरिक शारीरिक शुद्धि के जरिए स्वास्थ्य सुधार का दावा करने वाली संस्था नैचुरल डाइट सिस्टम (एनडीएस, उचाना, हरियाणा) ने दिल्ली में तीन दिवसीय स्वास्थ्य शिविर आयोजित करने की घोषणा की है। यह शिविर 24 से 26 अक्टूबर 2026 तक दिल्ली के इंद्रलोक मेट्रो स्टेशन के निकट स्थित अग्रसेन भवन त्रिनगर, में आयोजित किया जाएगा।शिविर के लिए पंजीकरण उचाना केंद्र के माध्यम से शुरू हो चुके हैं। 
Live Broadcast YouTube link शाकाहार अपनाएं, स्वस्थ जीवन पाएं।
https://www.youtube.com/live/_Oni_H1Bt3g?si=d8iSPPsg1Ep0mtcq
प्राकृतिक व सात्विक आहार से शरीर,मन और आत्मा संतुष्ट होती है।

शिविर के संयोजक सतीश जांगड़ा के अनुसार, इस आवासीय एवं गैर-आवासीय शिविर में लगभग सौ प्रतिभागियों की व्यवस्था की गई है। दिल्ली और बाहर से आने वाले प्रतिभागियों के लिए ठहरने और तीन दिनों तक निर्धारित प्राकृतिक आहार की व्यवस्था की गई है। शिविर में पंजीकरण के लिए सतीश जांगड़ा  ने दूरभाष नंबर 9466318750 जारी किया है। कार्यक्रम में मनप्रीत कौर, निखिल, आचार्य सूर्य देव आर्य,बिंदा मन्ना ,विजय मिगलानी,सुभाष , सुनीता,‌,आकांक्षा, ,वजीर सिंसार,प्रवीण मल्होत्रा , मयंक,नीलिमा चटर्जी आदि जूड़े। आरजेएस परिवार अमेरिका से डा. रमैया मुथ्थियाला ने स्वस्थ जीवन के लिए शाकाहार अपनाने को बढ़ावा दिया।

यह घोषणा आरजेएस पॉजिटिव मीडिया और रामजानकी संस्थान पॉजिटिव ब्रॉडकास्टिंग हाउस के संस्थापक व राष्ट्रीय संयोजक उदय कुमार मन्ना द्वारा स्वास्थ्य, शाकाहार और जीवनशैली सुधार के विश्वव्यापी जागरूकता अभियान के 673वी पाॅजिटिव मीडिया संगोष्ठी के दौरान की गई। श्री मन्ना ने बताया कि अग्रसेन भवन त्रिनगर, दिल्ली शिविर में भी प्रतिभागियों से रूबरू संवाद करने के लिए आयोजकों द्वारा आमंत्रित किया गया है।।इस तरह ग्लोबल शाकाहारी आंदोलन के डाक्यूमेंटेशन का व्यापक कार्य किया जाएगा।

हरियाणा के जींद जिले स्थित उचाना एनडीएस की प्रमुख सुमन जांगड़ा ने बताया कि उन्होंने स्वयं तीन वर्ष पूर्व जींद में न्यू डायट सिस्टम , गुजरात के संस्थापक बी वी चौहान की प्रेरणा से आयोजित पांच दिवसीय शिविर में भाग लेकर उच्च रक्तचाप और मधुमेह जैसी समस्याओं पर नियंत्रण पाया था। इसके बाद उन्होंने उचाना के नए बस स्टैंड के पास एनडीएस  डिटॉक्स केंद्र की शुरुआत की, जो पिछले दो वर्षों से संचालित हो रहा है। इसमें काउंसलिंग के द्वारा नैचुरल डायट प्लान समझाया जाता है,जिसका आज बहुत सारे लोग लाभ उठा रहे हैं। वेलनेस एक्सपर्ट सुमन जांगड़ा ने प्रणाली की व्याख्या करते हुए कहा कि बार-बार तला-भुना और अत्यधिक पका हुआ भोजन करने से पाचन तंत्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। उन्होंने दावा किया कि पका हुआ खाना पचने में छह से सात घंटे का समय लेता है, जबकि प्राकृतिक कच्चा आहार एक से डेढ़ घंटे में पच जाता है। इस पद्धति के तहत रोगियों को हरी पत्तियों के रस, जिसमें पालक, धनिया, पुदीना, सहजन और अदरक शामिल हैं, के अलावा ताजे फल और कच्ची सब्जियों से बने व्यंजन दिए जाते हैं। उन्होंने दूध और पनीर के स्थान पर नारियल, मूंगफली, तिल और सोयाबीन से तैयार वनस्पति आधारित दूध के उपयोग की वकालत की।
कार्यक्रम में कई लाभार्थियों ने अपने अनुभव साझा किए। हांसी निवासी एवं नरवाना में सहकारिता विभाग में निरीक्षक पद पर कार्यरत सुनीता रानी ने बताया कि वर्षों पुरानी पाचन संबंधी समस्याओं, जोड़ों के दर्द और अन्य जटिलताओं में कच्चा आहार और ग्रीन जूस अपनाने के बाद उल्लेखनीय सुधार हुआ। अमृतसर की मनप्रीत कौर ने शिविर के माध्यम से अपने वजन में तीस किलोग्राम से अधिक की कमी आने और ऊर्जा स्तर सुधरने की जानकारी दी। एक अन्य प्रतिभागी निखिल ने बताया कि प्राकृतिक रस और कच्चे खाद्य पदार्थों को दिनचर्या में शामिल करने से उनकी शारीरिक थकान दूर हुई। हरियाणा सरकार में पूर्व योग शिक्षक रहे आचार्य सूर्यदेव आर्य ने भी अपनी पत्नी के स्वास्थ्य में आए सकारात्मक बदलाव का उल्लेख किया।
आरजेएस परिवार,अमेरिका से जुड़े दुर्लभ बीमारियों के शोधकर्ता डॉ. रमैया मुथ्याला ने शाकाहार के वैश्विक और पर्यावरणीय पहलुओं पर विचार रखे और कहा कि वो स्वयं शाकाहारी हैं। । पिछले चौवन वर्षों से अमेरिका में रह रहे डॉ. मुथ्याला ने कहा कि मांसाहार की तुलना में शाकाहारी खाद्य उत्पादन में जल और ऊर्जा संसाधनों की खपत काफी कम होती है। हालांकि, उन्होंने भारतीय कृषि में कीटनाशकों के बढ़ते इस्तेमाल पर चिंता जताते हुए रासायनिक अवशेषों से मुक्त खेती को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया।
उदय मन्ना ने बताया कि यह शाकाहारी स्वास्थ्य अभियान जनवरी में प्रस्तावित पंद्रह दिवसीय अंतरराष्ट्रीय प्रवासी दिवस और गणतंत्र दिवस कार्यक्रमों की श्रृंखला का हिस्सा है, जिसके तहत शाकाहार, पर्यावरण संरक्षण और स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जनचेतना का प्रसार किया जा रहा है। 

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Global Cultural Conclave Calls for Eco-conscious Ramlila ,  Environmental Protection, Navratri and Vegetarianism as Navratri Approaches.


NEW DELHI
Cultural thinkers, educators, and social advocates from India, Mauritius, and the United Kingdom converged at an international webinar on Wednesday to call for environmental stewardship, women's dignity, and dietary restraint. 
The discussions linked the conclusion of Pitru Paksha and Wildlife Week to the upcoming Sharadiya Navratri and Ramlila festivities, urging that traditional rituals be translated into daily social and ecological action.

The event marked the 666th web gathering organized by RJS Positive Media. Centered on the theme of nature, faith, power, and the values of Ram and Sita as a confluence of traditions in the month of Ashwin, the session highlighted practical reforms across community life, heritage preservation, and public health.
Presiding over the webinar, Rajesh Sharma, founder of the Prakriti Bhakt Foundation and patron of Delhi's Dharmik Bal Utsav Trust, announced that an eco-conscious Ramlila will be staged from October 10 to October 21 at the Jan Sabha Ground in Sector 14, Dwarka, New Delhi.
 Sharma stated that the production would incorporate depictions of national martyrs alongside extensive messaging on environmental preservation and afforestation. He expressed deep concern over the displacement of wildlife, remarking that animals appearing near human settlements are victims of habitat destruction rather than threats, and called on society to respect the right of all living creatures to inhabit the planet.


Outlining a major upcoming advocacy initiative, Special Guest Nitin Mehta, MBE, founder of the Indian Vegetarian and Vegan Society in London and Hon.In-charge  of RJS Positive Branch, London ,UK chapter, announced plans for a large-scale non-violence and vegetarian campaign in Delhi this coming January. Mehta said the movement will ask participants to pledge against consuming meat, fish, and eggs, while encouraging a gradual transition away from dairy products to curb animal suffering. He asserted that reverence for animals is a foundational gift of Indian civilization to the world and must be revived actively.


Dr. Vinod Bala Arun, president of the Ramayan Centre in Mauritius and chief guest at the session, observed that Indian festivals celebrated across the diaspora reflect deep connections to nature and seasonal shifts. Explaining the contrast in seasons between the northern and southern hemispheres, she noted that fasting and festivals serve to discipline the human body and mind in rhythm with climatic changes. She emphasized that Navratri's worship of the goddess embodies three vital forces: physical vitality through Kali, material resources through Lakshmi, and intellect and discretion through Saraswati. Dr. Arun shared that while full-scale Ramlila performances remain limited in Mauritius compared to India or Fiji, the Ramayan Centre organizes an Akhand Ramayan recitation on Vijaya Dashami alongside youth-focused cultural presentations to root the younger generation in core moral values.

Addressing the assembly from Mauritius as a special guest, Dr. Somdutt Kasinath, deputy head master and multilingual author associated with the Ministry of Education and Human Resources, stressed that ecological balance is embedded in ancient Indian texts. Quoting the Prithvi Sukta from the Atharvaveda, which reveres the Earth as a mother, he argued that religious rituals lose meaning if natural water bodies and trees are left polluted and destroyed. He insisted that worshipping divine feminine power in temples must be matched by guaranteeing real safety, education, and equal opportunity for women across homes and workplaces. Dr. Kasinath proposed four collective resolutions: integrating conservation into routine life, uniting faith with rational wisdom, defending women's dignity, and adopting the truth and restraint personified by Ram and Sita.


Delivering the keynote address, Brahma Kumari Lata Didi, motivational speaker from the Rajyoga Centre in Derawal Nagar, Delhi, called for a shift from superficial ritualism to internal transformation. She remarked that true faith during Pitru Paksha lies in respecting living parents and elders rather than merely performing ceremonial offerings after their demise. Speaking on the spiritual essence of diet, she explained that preparing sattvik food requires a conscious intent of offering and purity rather than viewing dietary restrictions as a temporary nine-day burden. She also analyzed the philosophical dimensions of Ram, describing the ideal personality as one defined by disciplined adherence to duty, humility, and the conquest of internal vices.

Offering ground-level observations from the Himalayan region, participant Pitamber Manoj from Uttarakhand contrasted the restorative qualities of clean mountain air and herbal biodiversity with unchecked urban pollution. However, he warned of evident ecological distress in the hills, pointing out that butterfly populations and native birds have dropped dramatically over the past two decades due to environmental disruptions.

Uday Manna, founder and national convenor of Positive Media, coordinated the proceedings and announced that a 10-day video awareness series on Navratri, Ramlila, and positive living will be anchored by Dr. Om Prakash of the organization's youth wing in Patna. Manna also highlighted ongoing social initiatives, including a blood donation awareness drive in collaboration with the Indian Red Cross Society and the departure of the 26th Asthi Kalash Visarjan Yatra from Delhi to Haridwar, led by Vijay Sharma of the Shri Devotthan Seva Samiti with 5,366 unclaimed mortal remains. Toward the end of the broadcast, Manna paid condolences referencing reports of the demise of veteran actor Nana Patekar. The deliberations of the international session are scheduled to be documented in a monthly newsletter to be released on National Unity Day, October 31.

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प्रकृति संरक्षण, नवरात्र व शाकाहार और बाल उत्सव रामलीला पर अंतरराष्ट्रीय वेबिनार में मंथन व नाना पाटेकर को श्रद्धांजलि 
दिल्ली की धार्मिक बाल उत्सव रामलीला में शहीदों व प्रकृति संरक्षण पर भी होगा संदेश 

श्रीदेवोत्थान सेवा समिति का दिल्ली से 5,366 लावारिस अस्थि कलशों के साथ 26वीं विसर्जन यात्रा हरिद्वार के लिए रवाना 

नई दिल्ली,
पितृपक्ष के समापन, वन्यजीव सप्ताह की पूर्णता और शारदीय नवरात्र तथा रामलीला के शुभारंभ के अवसर पर आरजेएस पीबीएच -आरजेएस पाॅजिटिव के संस्थापक व राष्ट्रीय संयोजक उदय कुमार मन्ना द्वारा 8 अक्टूबर 2026 को आयोजित अंतरराष्ट्रीय वेबिनार में भारत, मॉरीशस और ब्रिटेन के चिंतकों ने पर्यावरण संरक्षण, नवरात्रि व सात्विक जीवनशैली और श्रीराम -जानकी के मानवीय मूल्यों की समाज में पुनर्स्थापना का आह्वान किया। वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि धार्मिक पर्वों और अनुष्ठानों की सार्थकता केवल पूजा-पाठ तक सीमित रहने में नहीं, बल्कि प्रकृति और समाज के प्रति जिम्मेदार आचरण अपनाने में है।
आरजेएस पॉजिटिव मीडिया के 666वें अंतरराष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन प्रकृति, श्रद्धा, शक्ति और श्रीराम-जानकी की मर्यादा: आश्विन मास के संस्कारों की त्रिवेणी विषय पर किया गया। आरजेएस साधक डा. ओमप्रकाश के दस दिवसीय आद्यशक्ति की आराधना और श्री राम -जानकी की मर्यादा के महत्व पर विडियो संदेश को प्रसारित किया जाएगा।
 कार्यक्रम में प्रसिद्ध फिल्म अभिनेता नाना पाटेकर को श्रद्धांजलि दी गई और पितृपक्ष में श्रीदेवोत्थान सेवा समिति का दिल्ली से 5,366 लावारिस अस्थि कलशों के साथ 26वीं विसर्जन यात्रा हरिद्वार के लिए रवाना होने की जानकारी दी गई।
 कार्यक्रम में रामायण सेंटर, मॉरीशस की अध्यक्ष डॉ. विनोद बाला अरुण , इंडियन वेजिटेरियन एंड विगन सोसाइटी के संस्थापक और पॉजिटिव मीडिया यूके शाखा के प्रमुख नितिन मेहता (एमबीई), प्रकृति भक्त फाउंडेशन के संस्थापक और धार्मिक बाल उत्सव ट्रस्ट, दिल्ली के संरक्षक राजेश शर्मा , ब्रह्माकुमारीज डेरावल नगर, दिल्ली की प्रेरक वक्ता बीके लता बहन और मॉरीशस के शिक्षा एवं मानव संसाधन मंत्रालय के उप मुख्य अध्यापक व बहुभाषी लेखक डॉ. सोमदत्त काशीनाथ आदि ने अपने विचार व्यक्त किए।
वेबिनार की अध्यक्षता करते हुए प्रकृति भक्त फाउंडेशन के संस्थापक और धार्मिक बाल उत्सव ट्रस्ट, दिल्ली के संरक्षक राजेश शर्मा ने बताया कि 10 अक्टूबर से 21 अक्टूबर तक द्वारका सेक्टर 14 स्थित जनसभा ग्राउंड में एक विशेष रामलीला का मंचन किया जाएगा। यह रामलीला देश के अमर शहीदों की स्मृति और पर्यावरण संरक्षण के संदेश को समर्पित होगी, जिसमें वृक्षारोपण और स्वच्छता से जुड़े विचार प्रसारित किए जाएंगे। वन्यजीव सप्ताह के संदर्भ में उन्होंने कहा कि मनुष्यों ने वन्य जीवों के प्राकृतिक आवास उजाड़ दिए हैं, जिससे पारिस्थितिकी संतुलन बिगड़ा है। उन्होंने धरती के सभी प्राणियों के प्रति सह-अस्तित्व और करुणा की भावना रखने की अपील की।
लंदन से जुड़े इंडियन वेजिटेरियन एंड विगन सोसाइटी के संस्थापक और आरजेएस पॉजिटिव ब्रांच,लंदन,यूके शाखा के मानद प्रभारी नितिन मेहता (एमबीई) ने बताया कि आगामी जनवरी माह में गणतंत्र व प्रवासी भारतीय दिवस के उपलक्ष्य में आरजेएस पीबीएच का दिल्ली से एक विश्व व्यापी "शाकाहार और जीव-दया अभियान" प्रारंभ किया जाएगा। इस अभियान के तहत लोगों को मांसाहार त्यागने का संकल्प दिलाया जाएगा और आगे चलकर दूध उत्पादों से परे विगन जीवनशैली अपनाने की दिशा में प्रेरित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जीव-दया भारत का विश्व को दिया गया सबसे बड़ा संदेश है और जलवायु संकट के दौर में प्रकृति के अनुकूल आहार अपनाना अनिवार्य हो चुका है।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि एवं रामायण सेंटर, मॉरीशस की अध्यक्ष डॉ. विनोद बाला अरुण ने कहा कि भारतीय त्योहार केवल उत्सव नहीं हैं, बल्कि वे प्रकृति और ऋतु परिवर्तन के साथ मानव जीवन के गहरे संतुलन का माध्यम हैं। उन्होंने बताया कि भारत और मॉरीशस के मौसम में विपरीत स्थिति होने के बावजूद प्रवासी समाज में पर्वों की आस्था समान रूप से जीवंत है। नवरात्र के प्रतीकों की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि मां काली शक्ति और शारीरिक सामर्थ्य की, मां लक्ष्मी साधन और समृद्धि की, तथा मां सरस्वती विवेक और विद्या की अधिष्ठात्री हैं। डॉ.विनोद बाला अरुण ने जानकारी दी कि मॉरीशस में रामायण सेंटर विजयादशमी पर अखंड रामायण पाठ और सांस्कृतिक मंचन के जरिए नई पीढ़ी को मर्यादा और त्याग के मूल्यों से जोड़ने का निरंतर प्रयास कर रहा है।
मॉरीशस के शिक्षा एवं मानव संसाधन मंत्रालय के उप मुख्य अध्यापक व बहुभाषी लेखक डॉ. सोमदत्त काशीनाथ ने विशिष्ट अतिथि के रूप में कहा कि भारतीय परंपरा में प्रकृति को माता का दर्जा दिया गया है। अथर्ववेद के पृथ्वी सूक्त का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यदि पृथ्वी हमारी माता है तो नदियों को प्रदूषण से बचाना और वनों का संरक्षण करना हमारा बुनियादी दायित्व है। उन्होंने कहा कि मंदिरों में देवी की आराधना तब तक अधूरी है जब तक समाज में महिलाओं को वास्तविक सुरक्षा, सम्मान, शिक्षा और समान अवसर न मिलें। डॉ. काशीनाथ ने दैनिक जीवन में प्रकृति संरक्षण, विवेकपूर्ण श्रद्धा, नारी सम्मान और श्रीराम-जानकी के मर्यादापूर्ण आदर्शों को अपनाने के चार संकल्प प्रस्तुत किए।
मुख्य वक्ता के रूप में जुड़ीं ब्रह्माकुमारीज डेरावल नगर, दिल्ली की प्रेरक वक्ता बीके लता बहन ने कहा कि श्रद्धा केवल देहावसान के बाद की रस्मों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि जीवित अवस्था में माता-पिता और बुजुर्गों का आदर करना ही सच्ची श्रद्धा है। सात्विक आहार की महत्ता पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि भोजन बनाते समय ईश्वरीय स्मृति और सकारात्मक मंशा का भाव ही अन्न को प्रसाद का स्वरूप देता है। उन्होंने श्रीराम के विभिन्न दार्शनिक स्वरूपों की व्याख्या करते हुए कहा कि रामलीला केवल मनोरंजन का माध्यम न बने, बल्कि उसके माध्यम से आंतरिक विकारों और बुराइयों रूपी रावण को समाप्त कर मर्यादा का पालन करने का संस्कार विकसित होना चाहिए।
उत्तराखंड से जुड़े पीतांबर मनोज ने हिमालयी क्षेत्र के पर्यावरण का प्रत्यक्ष अनुभव साझा करते हुए बताया कि पिछले दो दशकों में जंगलों में तितलियों और पक्षियों की संख्या में चिंताजनक गिरावट आई है। उन्होंने कहा कि आधुनिक उपभोगवादी संस्कृति ने पर्यावरण को नुकसान पहुंचाया है, जबकि पारंपरिक ज्ञान और आयुर्वेद प्रकृति के साथ तालमेल बिठाकर जीने की राह दिखाते हैं।
कार्यक्रम में राजेंद्र सिंह कुशवाहा ,बिंदा मन्ना, सुनील कुमार सिंह,स्वीटी पॉल, अमृता घई, इशहाक खान , आकांक्षा , पीतांबर मनोज,बीके, मयंक राज आदि शामिल हुए।

पॉजिटिव मीडिया के राष्ट्रीय संयोजक उदय मन्ना ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए बताया कि पटना से डॉ. ओमप्रकाश के नेतृत्व में नवरात्र और रामलीला के संदेशों को लेकर 10 दिवसीय वीडियो श्रृंखला चलाई जाएगी। उन्होंने इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी के साथ मिलकर चलाए जा रहे रक्तदान जागरूकता अभियान और श्रीदेवोत्थान सेवा समिति द्वारा विजय शर्मा के नेतृत्व में 5,366 लावारिस अस्थि कलशों को हरिद्वार ले जाने वाली 26वीं विसर्जन यात्रा का भी ब्योरा दिया। कार्यक्रम के अंत में मन्ना ने अभिनेता नाना पाटेकर के निधन की सूचना का उल्लेख करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अंतरराष्ट्रीय विमर्श की संपूर्ण कार्यवाही 31 अक्टूबर को राष्ट्रीय एकता दिवस पर जारी होने वाले मासिक न्यूजलेटर में प्रकाशित की जाएगी।

आरजेएस पीबीएच 
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Durga Puja 2026 at Ramakrishna Mission New Delhi.
May we overcome our inner weaknesses and violent tendencies to become noble and ideal human beings – Swami Sarvalokananda

New Delhi.  Preparations for this year's Durga Puja have begun across the country. Swami Sarvalokananda, Secretary of Ramakrishna Mission, New Delhi, shared with Positive Media the history and special features of Durga Puja at the Mission.

He said that at the New Delhi centre, Devi Jagran and Durga Puja have been started in a very grand, sattvic and scripturally authentic manner since the year 2023. Earlier, puja was performed only with a picture (photo) on Ashtami day. At the Mission, the puja will begin on Durga Shashti on 16th October and continue till Vijayadashami.
*Sattvikta and Devotion:* Here, puja is performed on Saptami, Ashtami and Navami, and Visarjan on Dashami. Instead of external show and ostentation, emphasis is laid on inner devotion, simplicity and observance of scriptural methods.

*The True Spirit and 'Theme' of Durga Puja*
*True Objective:* The fundamental purpose of worshipping Maa Durga is that we become good human beings and ideal citizens. Our inner evil tendencies (vices) should end and our hearts should be filled with noble thoughts.

*'Demons' of the Modern Age:* Referring to the slaying of Mahishasura by Maa Durga, he said that in today's times, evils are hidden within people in the form of evil tendencies and negative thoughts. Therefore, puja should not be merely for feasting or pomp and show, but for self-improvement and awakening inner devotion.

*Significance of Navratri and Various Forms*

*Nine Forms of the Mother:* A devotee is not satisfied with one form, he wants to worship the Mother in various forms. That is why in Sanatan Dharma there is a tradition of worshipping many forms of God.

*Primacy of Inner Feeling:* Whether a person observes a fast, takes fruits or offers sattvic or rajasic bhog, the most important thing is whether true devotion towards the Mother is awakening in his heart or not.

*Message for Youth and Society*

*Swami Vivekananda's Prayer:* Youth should adopt the spirit of Swami Vivekananda, who prayed to Maa Jagadamba that his weakness and cowardice be removed and that he become a true 'Man'.

*Need for Sanskar:* Expressing concern over the growing violence and weakness in society and among youth today, he said that instead of putting children only in the race for marks or jobs, parents should teach them good sanskar, spirit of service and to become noble human beings.

*Tradition of Puja at Various Centres of Ramakrishna Mission*

*Two Types of Methods:* At some centres (like Bengal and some main branches) puja is performed elaborately from Saptami to Dashami by making an idol, while at most centres in India and abroad, puja is performed with a photo on Ashtami day itself.

*Appeal to Devotees:* In the end, he urged all devotees to pray that Maa may remove the weaknesses of our minds and violent feelings and make us noble and ideal human beings.

Two books, G-6, from RJS PBH's Positive Media House were presented to the library of Ramakrishna Mission.

Watch: YouTube Link
https://youtu.be/fBbZt1G_wjA?si=cposOakErf6rNX5w

दुर्गा पूजा 2026: 
मन की दुर्बलताओं और हिंसा भाव को दूर कर हम एक नेक और आदर्श इंसान बनें- स्वामी सर्वलोकानंद 

नई दिल्ली। देशभर में इस साल की दुर्गा पूजा की तैयारियां शुरू हो गई हैं। रामकृष्ण मिशन,नई दिल्ली के सचिव स्वामी सर्वलोकानंद ने पाॅजिटिव मीडिया को मिशन की दुर्गा पूजा का इतिहास व विशेषता बताई। उन्होंने कहा कि नई दिल्ली स्थित केंद्र में वर्ष 2023 से देवी जागरण और दुर्गा पूजा की शुरुआत बहुत ही भव्य, सात्विक एवं शास्त्रसम्मत रीति से की गई। इससे पहले केवल अष्टमी के दिन चित्र (फोटो) में पूजा होती थी। मिशन में 16 अक्टूबर को दुर्गा षष्ठी से पूजा शुरू होकर विजयादशमी तक चलेगी।
सात्विकता और भक्ति : यहाँ सप्तमी, अष्टमी और नवमी को पूजा तथा दशमी को विसर्जन होता है। पूजा में बाहरी दिखावे और आडंबर के बजाय आंतरिक भक्ति, सरलता और शास्त्रोक्त विधियों के पालन पर जोर दिया जाता है।
 दुर्गा पूजा का वास्तविक भाव व 'थीम'
सच्चा उद्देश्य : माँ दुर्गा की पूजा का मूल उद्देश्य यही है कि हम अच्छे मनुष्य और आदर्श नागरिक बनें। हमारे भीतर की कुप्रवृत्तियाँ (दुर्गुण) समाप्त हों और हृदय श्रेष्ठ विचारों से भर जाए।
आधुनिक युग के 'राक्षस' : माँ दुर्गा द्वारा महिषासुर के वध का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि आज के समय में बुराइयाँ लोगों के भीतर कुप्रवृत्तियों और नकारात्मक विचारों के रूप में छिपी हैं। इसलिए पूजा मात्र खान-पान या तड़क-भड़क के लिए नहीं, बल्कि आत्म-सुधार और आंतरिक भक्ति भाव जागृत करने के लिए होनी चाहिए ।
 नवरात्र एवं विभिन्न रूपों की महत्ता
माँ के नौ रूप : भक्त किसी एक रूप से संतुष्ट नहीं होता, वह माँ को विभिन्न स्वरूपों में पूजना चाहता है। इसी कारण सनातन धर्म में ईश्वर के कई रूपों की उपासना की परंपरा है।
आंतरिक भाव की प्रधानता : व्यक्ति चाहे उपवास रखे, फलाहार करे या सात्विक अथवा राजसिक भोग लगाए, सबसे महत्वपूर्ण यह है कि उसके हृदय में माँ के प्रति सच्चा भक्ति भाव जागृत हो रहा है या नहीं।
युवाओं और समाज के लिए संदेश
स्वामी विवेकानंद की प्रार्थना : युवाओं को स्वामी विवेकानंद के भाव को अपनाना चाहिए, जिन्होंने माँ जगदम्बा से प्रार्थना की थी कि उनकी दुर्बलता और कायरता दूर हो और वे सच्चे 'मनुष्य' बनें।
संस्कारों की आवश्यकता : आज समाज और युवाओं में बढ़ती हिंसा व दुर्बलता पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि माता-पिता को बच्चों को केवल अंक लाने या नौकरी पाने की होड़ में डालने के बजाय अच्छे संस्कार, सेवा भाव और श्रेष्ठ इंसान बनने की सीख देनी चाहिए।
 रामकृष्ण मिशन के विभिन्न केंद्रों में पूजा की परंपरा
दो प्रकार की पद्धतियाँ : कुछ केंद्रों (जैसे बंगाल और कुछ मुख्य शाखाओं) में प्रतिमा बनाकर सप्तमी से दशमी तक विस्तृत रूप से पूजा होती है, जबकि देश-विदेश के अधिकांश केंद्रों में अष्टमी के दिन फोटो में ही पूजा-अर्चना संपन्न की जाती है ।
श्रद्धालुओं से अपील : अंत में उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से यही प्रार्थना करने का आग्रह किया कि माँ हमारे मन की दुर्बलताओं और हिंसा भाव को दूर कर हमें एक नेक और आदर्श इंसान बनाएँ।
रामकृष्ण मिशन की लाइब्रेरी के लिए आरजेएस पीबीएच की पाॅजिटिव मीडिया की दो पुस्तक G-6 प्रदान की गई।

उदय मन्ना 
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