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आरजेएस राष्ट्रीय पोषण सप्ताह: खानपान में सप्लीमेंट्स के बजाय आंतों के स्वास्थ्य और प्राकृतिक आहार को प्राथमिकता दें. इस‌अवसर पर आरजेएस का न्यूज लेटर विमोचित हुआ।
मंथली आरजेएस पाॅजिटिव मीडिया न्यूज लेटर का लोकार्पण और राष्ट्रीय पोषण सप्ताह पर चर्चा 
नई दिल्ली
राष्ट्रीय पोषण सप्ताह की पूर्व संध्या पर राम-जानकी संस्थान पाॅजिटिव ब्राॅडकास्टिंग हाउस (आरजेएस पीबीएच) द्वारा आयोजित एक राष्ट्रीय वेबिनार में संस्था के राष्ट्रीय ऑब्जर्वर दीप माथुर ने अतिथियों का स्वागत किया और कहा कि  सोशल मीडिया पर चल रहे भ्रामक आहार प्रयोगों और सिंथेटिक प्रोटीन सप्लीमेंट्स के अंधाधुंध उपयोग के प्रति हमें सचेत रहने की जरूरत है। इस अवसर पर रिलीज आरजेएस के मंथली न्यूज लेटर को अनूठा बताया और कहा कि ये सकारात्मक आंदोलन की महीने भर की गतिविधियों का दस्तावेज है। कार्यक्रम में स्वीटी पॉल, नीति अरोड़ा ,डॉ मुन्नी कुमारी, उदय शंकर सिंह कुशवाहा, राजीव जायसवाल, अमृता घई ,डॉ रश्मि चौबे, मुकेश कुमार सिंह ,रुखसाना परवीन, चित्रदीप,महिमा जायसवाल ,सोमेश ,गिरीश चंद्र भद्री आदि शामिल हुए।
संस्था के संस्थापक व राष्ट्रीय संयोजक उदय कुमार मन्ना ने कार्यक्रम का संयोजन व संचालन करते हुए लोगों से सकारात्मक सोच के साथ जो शरीर को साथ ले वैसा भोजन करना ही उपयुक्त है। आधुनिक जीवनशैली से पैदा हो रही गंभीर बीमारियों से बचाव का एकमात्र स्थाई उपाय आंतों के सूक्ष्मजीवों की सुरक्षा, संयमित दिनचर्या और संतुलित घरेलू आहार है।
आरजेएस पॉजिटिव मीडिया द्वारा डिस्कवर द पावर ऑफ न्यूट्रिशन विषय पर आयोजित 640वां विशेष विचार गोष्ठी को संबोधित करते हुए राजस्थान स्थित एमजी यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी में प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस डॉ. ईशी खोसला ने बताया कि इसका मुख्य कारण हमारा बदला हुआ खाद्य तंत्र और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड भोजन है। खाद्य उद्योग द्वारा तैयार किए जा रहे कई उत्पादों में ऐसे तत्व मिलाए जाते हैं जो मस्तिष्क में कृत्रिम तलब पैदा करते हैं, जिससे भूख को नियंत्रित करने वाले प्राकृतिक हार्मोन असंतुलित हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि मानव शरीर का संपूर्ण स्वास्थ्य, पाचन, रोग प्रतिरोधक क्षमता, जीन की कार्यप्रणाली और मानसिक संतुलन आंतों में मौजूद माइक्रोबायोटा पर निर्भर करता है। तकनीकी सत्र में डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल के वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी संजय वर्मा ने स्वास्थ्य रक्षा के अर्न सिद्धांत को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि निरंतर व्यायाम, सकारात्मक सोच, समुचित विश्राम और संतुलित पोषण जीवन के मूल आधार हैं।वर्मा ने कहा कि मानव शरीर में एक जैविक घड़ी कार्य करती है, जिसे पर्याप्त नींद और विश्राम की आवश्यकता होती है। उन्होंने सफेद चीनी, अत्यधिक परिष्कृत नमक और चाय-कॉफी की लत से बचने का परामर्श दिया, क्योंकि ये भूख की प्राकृतिक अनुभूति को नष्ट करते हैं।पोल्ट्री फार्मों में एंटीबायोटिक दवाओं के अत्यधिक प्रयोग का उल्लेख करते हुए उन्होंने बाजार से आने वाली सब्जियों को हल्के गुनगुने नमक के पानी में धोने और भोजन पकाने के पारंपरिक तरीकों को अपनाने का सुझाव दिया ताकि रासायनिक अवशेषों के प्रभाव को कम किया जा सके।
 प्रश्नोत्तर सत्र के दौरान आरजेएस के राष्ट्रीय प्रतिनिधि दीप माथुर ने पोषण की सही स्थिति को मापने के मापदंडों पर प्रश्न किया। इसके उत्तर में डॉ. खोसला ने बताया कि सुबह उठने पर ताजगी, मानसिक स्पष्टता, पेट का सुचारू संचालन और कमर का संतुलित घेरा व्यक्ति के सही पोषण के प्राथमिक संकेत हैं।
श्रोता स्वीटी पॉल द्वारा इंटरनेट पर प्रचलित डाइट वीडियो, भोजन की मात्रा और बच्चों की आदतों पर पूछे गए सवाल के जवाब में डॉ. खोसला ने कहा कि भोजन को तोलने की आवश्यकता नहीं है। भोजन करते समय अस्सी प्रतिशत पेट भरने पर रुक जाना चाहिए, क्योंकि तृप्ति का संदेश पंद्रह मिनट बाद मस्तिष्क तक पहुंचता है। उन्होंने सलाह दी कि बच्चों को प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों से दूर करने के लिए घर में ही पौष्टिक, पारंपरिक और विविध राज्यों के स्वादिष्ट व्यंजन बनाए जाएं।

कार्यक्रम का संचालन करते हुए आरजेएस पॉजिटिव मीडिया के संयोजक उदय कुमार मन्ना ने बताया कि भारत सरकार के खाद्य एवं पोषण बोर्ड द्वारा 1982 में राष्ट्रीय पोषण सप्ताह की शुरुआत की गई थी, जिसका उद्देश्य नागरिकों को पोषण के प्रति जागरूक करना है।

कार्यक्रम के अंत में उदय मन्ना और दीप माथुर द्वारा संस्था के मासिक न्यूजलेटर का औपचारिक विमोचन किया गया। इस न्यूजलेटर में आजादी पर्व के अंतरराष्ट्रीय पखवाड़े, पुस्तक वितरण, लंदन और नेपाल से जुड़ी गतिविधियों और दिवंगत रंगकर्मियों को दी गई श्रद्धांजलि का विस्तृत संकलन किया गया है। डिजिटल माध्यम से जुड़े प्रतिभागी राजीव ने इस जन-जागरूकता अभियान की सराहना की, जबकि आयोजकों ने सकारात्मक संवाद और वैज्ञानिक स्वास्थ्य शिक्षा को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प दोहराया। 
ईशी खोसला ने कहा कि देश में पोषण और स्वास्थ्य को लेकर जानकारी का अभाव नहीं है, फिर भी बीस से तीस वर्ष के युवाओं में हृदय रोग, मधुमेह, उच्च रक्तचाप, फैटी लिवर और थायरॉयड जैसी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं।
डा.खोसला ने स्पष्ट किया कि फसलों में हुए अत्यधिक आनुवंशिक बदलावों और आधुनिक हाइब्रिड अनाजों के लंबे उपयोग से आंतों की आंतरिक परत कमजोर हो रही है, जिससे शरीर में सूजन, पोषक तत्वों की कमी और ऑटो-इम्यून विकार पनप रहे हैं। डॉ. खोसला ने अपने क्लिनिकल अनुभवों का हवाला देते हुए बताया कि आहार में सही अनाज और पोषण का चयन करके गंभीर मानसिक तनाव, अवसाद और व्यवहार संबंधी विकारों को भी सफलतापूर्वक नियंत्रित किया जा सकता है।

बाजार में बढ़ते प्रोटीन सप्लीमेंट्स के प्रचलन पर डॉ. खोसला ने कहा कि सामान्य व्यक्ति को प्रति किलोग्राम शरीर भार पर लगभग 0.8 से 1 ग्राम प्रोटीन की आवश्यकता होती है, जबकि नियमित कसरत करने वालों के लिए 1.5 ग्राम तक पर्याप्त है। इसे दैनिक प्राकृतिक भोजन से आसानी से प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि डिब्बाबंद सिंथेटिक प्रोटीन और आइसोलेट्स शरीर में आंतरिक सूजन बढ़ाते हैं, कोलेस्ट्रॉल का स्तर बिगाड़ते हैं और अंगों पर अनावश्यक दबाव डालते हैं।

दैनिक जीवन के लिए डॉ. खोसला ने थ्री-पी का नियम प्रस्तुत किया। इसमें पहला पीक हंगर प्लानिंग है, जिसके तहत अगले दिन के खानपान की पूर्व योजना बनाई जाए ताकि शाम 4 से 7 बजे के बीच होने वाली अनियंत्रित भूख में जंक फूड से बचा जा सके। साथ ही अपनी शारीरिक अनुकूलता के अनुसार अनाज का चयन हो और सूर्यास्त के बाद भारी अनाज का सेवन न किया जाए। दूसरा प्रोटीन-फर्स्ट अप्रोच है, जिसमें दिन के कम से कम दो मुख्य भोजनों में दाल, पनीर या अन्य प्राकृतिक प्रोटीन को सब्जियों के साथ प्रमुखता दी जाए। तीसरा प्रोटेक्टिव फूड्स है, जिसके तहत कम से कम एक समय केवल फल, हरी सब्जियां, सलाद, सूप, फर्मेंटेड खाद्य पदार्थ, अच्छे वसा और पर्याप्त पानी का सेवन किया जाए, साथ ही शरीर के पुनर्निर्माण के लिए उपवास का सहारा लिया जाए। कार्यक्रम की विडियो।
https://www.youtube.com/live/wEnyNWfiOWg?si=oVH9DxZHPfHRo0pP
Release of Monthly Newsletter August.Pdf is available 


आकांक्षा मन्ना 
आरजेएस पीबीएच 
8368626368

Experts Urge Focus on Gut Microbiome and Natural Diets Over Processed Supplements at National Nutrition Week RJS Webinar 640.
Monthly Newsletter August Edition of RJS was released on 31st August.
NEW DELHI

Public health and clinical experts on Saturday cautioned against the uncritical adoption of social media dietary trends and synthetic supplements, emphasizing that restoring the gut microbiome and following disciplined meal planning remain the most effective defenses against the rising tide of lifestyle diseases among young Indians. On the eve of National Nutrition Week, Founder National Convener of RJS PBH -RJS POSITIVE MEDIA Uday Kumar Manna had organised 640th National webinar on Discover the Power of Nutrition. YT Link
https://www.youtube.com/live/wEnyNWfiOWg?si=oVH9DxZHPfHRo0pP

RJS PBH Positive Media Monthly Newsletter August 2026.... Release of Monthly Newsletter August.Pdf is available 
8368626368.

Speaking at a national webinar titled Discover the Power of Nutrition, organized by RJS Positive Media on the eve of National Nutrition Week, RJS PBH Observer Deep Mathur welcomed the leading clinical nutritionist Dr. Ishi Khosla and biochemistry specialist Sanjay Verma . He emphasized the important topic such as Discover the Power of Nutrition.He highlighted the physiological foundations of diet, warning that modern food processing and erratic eating schedules are driving metabolic and psychological disorders.

Dr. Ishi Khosla, practicing clinical nutritionist and Professor of Practice at MG University of Medical Sciences and Technology, Rajasthan, pointed out that despite widespread public awareness and access to dietary information, chronic conditions such as cardiovascular disease, diabetes, hypertension, fatty liver, and thyroid dysfunctions are appearing with alarming frequency among individuals in their twenties and thirties.

Dr. Khosla said the fundamental crisis lies in a disrupted food ecosystem and altered agricultural practices. She explained that modern ultra-processed foods contain additives and altered proteins designed to trigger cravings, overriding the body's natural appetite regulation. Central to this breakdown is the gut microbiota—the trillions of microorganisms residing in the digestive tract that govern nutrient absorption, hormone regulation, inflammation, genetic expression, and mental health.

According to Dr. Khosla, modern high-yielding crop varieties, particularly genetically altered grains, were developed during food shortages without adequate long-term safety studies on human digestion. Over decades, widespread exposure to such grains has compromised the intestinal lining, leading to systemic inflammation, nutrient deficiencies, and auto-immune disorders. She noted that dietary interventions addressing gut health have shown clinical success even in severe mental health cases, including severe depression and anxiety.

Addressing the growing commercial obsession with protein, Dr. Khosla cautioned against the routine use of synthetic protein powders and isolates. She stated that an average individual requires approximately 0.8 grams to 1 gram of protein per kilogram of body weight, while intense athletes may need up to 1.5 grams per kilogram—requirements that can easily be met through balanced, natural whole foods. She warned that synthetic isolates can induce gut inflammation, elevate cholesterol markers, and strain metabolic organs.

To build sustainable dietary habits, Dr. Khosla outlined a three-pillar framework based on the Three Ps. The first pillar is Peak hunger planning, which requires individuals to plan meals a day in advance to avoid impulsive junk food orders during high-vulnerability periods, especially the late afternoon hours between 4 PM and 7 PM. This also involves selecting grains suited to individual tolerance and avoiding grain consumption after sunset. The second pillar is a Protein-first approach, ensuring that at least two daily meals prioritize natural plant or animal protein paired with vegetables. The third pillar is Protective foods, dedicating at least one full meal to protective items such as fruits, leafy vegetables, salads, soups, fermented foods, prebiotics, and healthy fats like ghee, cold-pressed oils, or omega-3 fatty acids, supplemented by intermittent fasting to allow gut repair.

During the technical session, Sanjay Verma, Senior Technical Officer in the Department of Biochemistry at Dr. Ram Manohar Lohia Hospital, New Delhi, discussed health preservation through the EARN framework—standing for regular Exercise, positive Attitude, adequate Rest, and balanced Nutrition.

Verma emphasized the role of the biological clock, noting that human metabolism aligns with natural circadian cycles that require restorative sleep and routine physical exertion. He cautioned against the daily consumption of refined white sugar, excess table salt, and stimulant-laden beverages like strong tea and coffee, which suppress genuine hunger signals and create chemical dependency.

Verma also raised concerns regarding commercial non-vegetarian produce, arguing that the routine administration of antibiotics and growth accelerators in poultry farming poses significant health risks to consumers. He advised households to prepare pulses and grains through traditional boiling methods that discard excess starches, incorporate regular post-meal walking to aid gastric acid breakdown, and wash market vegetables in warm salt water to reduce surface residues and artificial colorings.

In the interactive question-and-answer segment, RJS national representative Deep Mathur asked how an individual can evaluate whether their nutritional approach is functioning properly. Dr. Khosla replied that baseline health is reflected in waking energy levels, mood stability, and digestive comfort, alongside clinical indicators such as waist circumference and metabolic lipid profiles.

Responding to queries from participant Sweety Paul regarding viral online diet recipes, portion sizes, and children's nutrition, Dr. Khosla stated that rigid weighing of food is counterproductive. Instead, she recommended eating until reaching approximately 80 percent satiety, noting that natural fullness registers within 15 minutes. She added that children hooked on ultra-processed snacks can be systematically weaned off cravings within two weeks by reducing refined grain intake and serving protein-rich, home-cooked regional dishes.

The program, moderated by RJS Positive Media founder Uday Kumar Manna, marked the 640th event in the organization's positive communication series. Manna recalled that National Nutrition Week was established in 1982 by the Food and Nutrition Board to foster dietary awareness across the country.

The webinar concluded with the unveiling of the monthly newsletter of the Positive Media Movement by Uday Manna and Deep Mathur. The publication documents recent national and international workshops, grassroots initiatives, cultural memorials, and patriotic programs conducted under the banner of the movement. Audience participant Rajiv, who joined via the digital platform, welcomed the public outreach initiative, while the organizers reiterated their commitment to expanding community health literacy through verified medical knowledge. Participants were Sweety Paul , Neeti Arora  ,Dr. Munni Kumari,
Uday Shankar Singh Kushwaha,  
Rajeev Jaiswal ,Amrita Ghai  ,Dr. Rashmi Chaube,  Mukesh Kumar Singh, 
Rukhsana Parveen,Chitradeep,
Mahima Jaiswal  ,Somesh,Girish Chandra Bhadri.

नेपाल त्रासदी में मृतको के अस्थि कलश लाकर गंगा में विसर्जन के लिए समिति तैयार।


नई दिल्ली। विगत 25 वर्षों से पूरे भारत वर्ष ही नही, बल्कि विदेशों से भी अनाम संग्रहित अस्थि कलशो को राजधानी दिल्ली लाकर पितृपक्ष में एक विशाल यात्रा के साथ हजारों अस्थि कलशो का हरिद्वार में कनखल के सतीघाट पर 100 किलो दूध की धारा के साथ वैदिक रीति से विसर्जन करने वाली संस्था श्री देवोत्थान सेवा समिति (पंजी.)ने नेपाल प्रशासन को पत्र लिखकर आग्रह किया है,कि वहां आई भयंकर त्रासदी में हजारों लोगों के शवो के अंतिम संस्कार के बाद बचे अस्थि कलशो को ससम्मान लाकर मां गंगा के आंचल में मोक्ष प्रदान करने के लिए समिति तैयार है। समिति के अध्यक्ष अनिल नरेंद्र ने कहा,कि नेपाल में आई भयंकर त्रासदी से पूरा विश्व स्तब्ध है,भारत सरकार भी निरंतर नेपाल की मदद कर रही है,इस त्रासदी में हजारों की संख्या में मृतकों की संख्या पहुंच रही है, प्रशासन उनका सामूहिक दाह-संस्कार भी कर रहा है, ऐसे में एक गिलहरी प्रयास के रूप में समिति ने नेपाल प्रशासन को पत्र लिखकर आग्रह किया है, कि यदि वे उचित समझे,तो संस्था को अस्थि कलश संग्रहण की अनुमति दे, जिससे की मानव जीवन के अंतिम मोक्ष कर्म को विधि-विधान से कर उनकी आत्मा को शांति प्रदान की जा सके।श्री नरेन्द्र ने कहा,कि समिति की युवा टीम नेपाल जाकर अस्थि कलशो का संग्रहण करने को तैयार हैं। समिति के महामंत्री विजय शर्मा ने कहा,कि इससे पूर्व भी समिति वर्ष 2011,2016 और 2025 में भी पाकिस्तान के कराची शहर में रखे करीब 695 अस्थि कलशो का भी विधिपूर्वक विसर्जन कर चुके हैं। उन्होंने कहां,कि इस बार भी 26 वीं अस्थि कलश विसर्जन यात्रा दिनांक 08 अक्टूबर 2026 को अनाम अस्थि कलशो को लेकर हरिद्वार के लिए रवाना होगी और अगले दिन 09 अक्टूबर 2026 को सभी अस्थि कलशो का विसर्जन किया जाएगा।

आरजेएस वेबिनार में जेन जी और जेन अल्फा के समग्र विकास , संस्कार, अनुशासन और व्यावहारिक शिक्षा पर विशेषज्ञों का जोर रहा 
उदय शंकर सिंह कुशवाहा की नातिन मानुषी के पांचवें जन्मदिन पर आरजेएस ने  जागरूकता कार्यक्रम किया 
31 अगस्त को आरजेएस पीबीएच पाॅजिटिव मीडिया न्यूज लेटर का लोकार्पण और राष्ट्रीय पोषण सप्ताह पर चर्चा करेगा.
आरजेएस युवा टोली, पटना सितंबर में सात विडियो संदेश वहीं टीआरडी27की  स्वीटी पाॅल व नीति अरोड़ा 29 सितंबर को कार्यक्रम को-होस्ट करेंगी।

नई दिल्ली
बदलते सामाजिक परिवेश में नई पीढ़ी यानी जेन जी और जेन अल्फा को सही दिशा देने के लिए परिवारों में संवाद, शिक्षण संस्थानों में संस्कार आधारित अनुशासन और रोजगारोन्मुखी व्यावहारिक शिक्षा का समावेश बेहद जरूरी है। सकारात्मक पत्रकारिता को समर्पित मंच आरजेएस पीबीएच - आरजेएस पॉजिटिव मीडिया के संस्थापक व राष्ट्रीय संयोजक उदय कुमार मन्ना ने  30 अगस्त को 639वें राष्ट्रीय वेबिनार का संयोजन व संचालन किया। उन्होंने 1 से 7 सितंबर तक मनाए जाने वाले राष्ट्रीय पोषण सप्ताह और आरजेएस युवा टोली द्वारा जारी किए जाने वाले जीवन निर्माण वीडियो संदेशों की रूपरेखा भी साझा की। टीआरडी27 की सदस्या नीति अरोड़ा ने 29 सितंबर 2026 विश्व हृदय दिवस का कार्यक्रम स्वीटी पाॅल के साथ को-होस्ट करने की घोषणा की।

आरजेएस पॉजिटिव ब्रांच नोएडा के मानद प्रभारी उदय शंकर सिंह कुशवाहा की नातिन मानुषी के 30 अगस्त पांचवें जन्मदिन के उपलक्ष्य में आयोजित इस विशेष परिचर्चा का मुख्य विषय युवाओं के सकारात्मक मूल्यों का विश्लेषण और स्वस्थ शरीर में स्वस्थ मन का निर्माण रहा। श्री कुशवाहा ने अतिथियों का स्वागत और धन्यवाद ज्ञापन किया। इस अवसर पर मानुषी ने केक काटा और सभी ने उसे ढेर सारी बधाइयां दीं। वेबिनार में 
मानुषी के देशभक्ति नृत्य की विडियो प्रस्तुत की गई।

मुख्य अतिथि के रूप में शांतिकुंज हरिद्वार के विदेश विभाग समन्वयक प्रो. प्रमोद भटनागर ने कहा कि बच्चे उपदेशों से नहीं, बल्कि बड़ों के आचरण से सीखते हैं। उन्होंने बच्चों के चरित्र निर्माण के लिए पांच बुनियादी सिद्धांतों पंचशील का उल्लेख किया, जिनमें मधुर व्यवहार, परिश्रमशीलता, मितव्ययिता, परस्पर सहयोग और सुव्यवस्था शामिल हैं। प्रो. भटनागर ने रेखांकित किया कि बाहरी चमक-दमक के बजाय आंतरिक गुणों और दृष्टिकोण को परिष्कृत करना आवश्यक है। रोजगार के मुद्दे पर उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी सरकार हर नागरिक को सरकारी नौकरी नहीं दे सकती, इसलिए युवाओं को उच्च शिक्षा के साथ-साथ लघु उद्योगों और आत्मनिर्भर बनाने वाले कौशलों की ओर उन्मुख होना चाहिए।

विशिष्ट अतिथि और ब्रह्माकुमारीज की आध्यात्मिक प्रशिक्षक बीके मेधा बहन ने विद्यार्थियों में बढ़ते मानसिक तनाव पर चिंता व्यक्त की। अल्बर्ट आइंस्टीन के विचारों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि विज्ञान साधन और सूचना उपलब्ध कराता है, जबकि आध्यात्मिकता उसे सही दिशा देती है। उन्होंने पतंग का दृष्टांत देते हुए समझाया कि मर्यादा और सांस्कृतिक मूल्य उस डोर की तरह हैं जो स्वतंत्रता को सार्थक बनाए रखते हैं। उन्होंने अभिभावकों को चेताया कि वे अपनी अधूरी इच्छाओं का बोझ बच्चों पर न लादें और घरेलू माहौल को सकारात्मक बनाए रखें ताकि बच्चे अवसाद और भय से मुक्त रह सकें।

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के राष्ट्रीय संयुक्त सचिव और दिल्ली मेडिकल काउंसिल के उपाध्यक्ष डॉ. नरेश चावला ने पीढ़ियों के सामाजिक बदलाव का विश्लेषण किया। उन्होंने कहा कि संयुक्त परिवारों के दौर से एकल परिवारों और इंटरनेट युग में पहुंचे बच्चों को सुख-सुविधाएं तो मिल रही हैं, लेकिन पारिवारिक समय और भावनात्मक समर्थन का अभाव महसूस हो रहा है। डॉ. चावला ने खेल और कला जगत के दिग्गजों का उदाहरण देते हुए कहा कि बच्चों की स्वाभाविक रुचि को पहचाना जाना चाहिए। उन्होंने जापान की प्राथमिक शिक्षा प्रणाली का हवाला देते हुए बताया कि वहां बच्चों को औपचारिक पढ़ाई से पहले स्वच्छता, शिष्टाचार और नागरिक अनुशासन सिखाया जाता है। उन्होंने अभिभावकों को बच्चों पर दबाव बनाने के बजाय उनके साथ मित्रवत संवाद स्थापित करने की सलाह दी।

सत्र के दौरान प्रतिभागी स्वीटी पॉल और नीति अरोड़ा ने प्राथमिक विद्यालयों में सकारात्मक दृष्टिकोण के पाठ्यक्रम और सामाजिक माध्यमों के नकारात्मक प्रभावों से बचाव को लेकर सवाल पूछे, जिनका विशेषज्ञों ने व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में राकेश मौर्य ,दिनेश कुमार कुशवाहा ,बृजानंद प्रसाद ,पवन कुमार , मयंक सुषमा शर्मा, तन्मय पाण्डया,सरिता कपूर ,धर्मेंद्र कुमार ,संदीप साहू अमृता घई , डॉ मुन्नी कुमारी, आकांक्षा और महाराज सिंह आदि शामिल हुए।
कार्यक्रम में राजेंद्र सिंह कुशवाहा, स्वीटी सहित अनेक प्रबुद्धजनों ने विचार रखे और युवा पीढ़ी को भटकाव से बचाकर राष्ट्र निर्माण में भागीदार बनाने के संकल्प के साथ संगोष्ठी संपन्न हुई।
आरजेएस के राष्ट्रीय संयोजक उदय कुमार मन्ना ने संगठन की ग्यारह वर्षों की विकास यात्रा और वर्ष 2047 तक चलने वाले सकारात्मक भारत दस्तावेजीकरण अभियान की जानकारी दी।

आरजेएस कार्यक्रम में महिला समानता ,ईद मिलाद-उन-नबी और ओणम पर महिला अधिकार और कर्तव्य पर हुआ संवाद  

 आरजेएस पॉजिटिव मीडिया का राष्ट्रीय कार्यक्रम: महिला समानता की शुरुआत घर और सकारात्मक सोच से होना जरूरी
आरजेएस कार्यक्रम में बीके शिवांगी बहन ने मानसिक शांति और एकाग्रता के लिए संक्षिप्त ध्यान अभ्यास कराया ।
नई दिल्ली
लैंगिक समानता केवल कानूनी प्रावधानों और नारों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसकी वास्तविक शुरुआत परिवार के भीतर समान परवरिश, घरेलू कार्यों के साझा बंटवारे और आंतरिक आत्मसम्मान से होनी चाहिए। RJS POSITIVE MEDIA YT LIVE BROADCAST -WEBINAR  LINK https://www.youtube.com/live/OaJwUXhxBjA?si=K6L4MUmT8hmlD4xW
आरजेएस पीबीएच -आरजेएस पाॅजिटिव मीडिया आंदोलन के तहत भारत मंडपम,नई दिल्ली की उप प्रबंधक (सेवा निवृत्त)अमृता घई द्वारा 26 मई 2026 को सह-आयोजित यह 636वां वेबिनार महिलाओं के अधिकार, समानता और पारिवारिक जिम्मेदारियों के विभिन्न पहलुओं पर केंद्रित था। अतिथियों में बीके शिवांगी, शहला निगार और जयति ओझा ने अधिकारों की बातचीत के साथ कर्तव्यों के निर्वहन पर भी समान रूप से ध्यान दिलाया। प्रतिभागियों में उदय शंकर सिंह कुशवाहा, स्वीटी पाॅल, सरिता कपूर,राजेन्द्र सिंह कुशवाहा, राकेश मौर्य,बृजानंद प्रसाद, डा.मुन्नी कुमारी ,नीति अरोड़ा,आकांक्षा, मयंक और बिन्दा मन्ना आदि शामिल रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए संस्था के संस्थापक व संयोजक उदय कुमार मन्ना ने कहा कि महिला समानता दिवस की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर प्रकाश डाला। इसके साथ ही उन्होंने पैगम्बर ए इस्लाम हज़रत मुहम्मद के जन्मदिन,मदर टेरेसा की जयंती और देश के ओणम जैसे विभिन्न सांस्कृतिक पर्वों का स्मरण करते हुए कहा कि कहा कि 1920 में 26 अगस्त को अमेरिकी संविधान संशोधन के साथ महिलाओं को मतदान का अधिकार मिला,जिसे 1971 में महिला समानता दिवस के रूप में मान्यता मिली।
भारत व्यापार संवर्धन संगठन (आईटीपीओ), भारत मंडपम की सेवानिवृत्त उप प्रबंधक अमृता घई ने अपने व्यक्तिगत जीवन का अनुभव साझा करते हुए कहा कि उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में अपनी बेटी को आत्मनिर्भर बनाया। उन्होंने जोर देकर कहा कि आधी आबादी के सशक्तिकरण के बिना कोई भी समाज प्रगति नहीं कर सकता। उन्होंने परिवारों से अपील की कि वे बेटियों की शिक्षा और करियर को बेटों के समान प्राथमिकता दें।
कार्यक्रम में माउंट आबू, राजस्थान से मुख्य अतिथि के रूप में जुड़ीं ब्रह्माकुमारीज संस्थान, आबू राज की प्रेरक वक्ता बीके शिवांगी बहन ने सशक्तिकरण के आध्यात्मिक और मानसिक पहलुओं को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि समानता की नींव व्यक्ति की अपनी सोच और आत्मसम्मान पर टिकी होती है। जब महिलाएं स्वयं को दुर्बल मानने के बजाय अपनी आंतरिक शक्तियों को पहचानती हैं, तब उनके दृष्टिकोण और आचरण में सकारात्मक बदलाव आता है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि दूसरों से अधिकार और सम्मान मांगने के बजाय अपनी क्षमताओं को सुदृढ़ बनाकर सकारात्मक योगदान देने वाला बनना चाहिए। सत्र के दौरान उन्होंने प्रतिभागियों को मानसिक शांति और एकाग्रता के लिए संक्षिप्त ध्यान अभ्यास भी कराया।

दूरदर्शन (डीडी न्यूज) की वरिष्ठ पत्रकार और एंकर शहला निगार ने समानता के व्यावहारिक और पारिवारिक अनुभवों को साझा किया। अपने परिवार का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि उनके घर में भाई-बहनों के बीच कार्यों का कोई भेदभाव नहीं था और नाम में भी माता-पिता दोनों की पहचान को स्थान दिया गया। 

अधिवक्ता एवं लेखिका डॉ. जयती ओझा ने कहा कि स्त्री और पुरुष का संबंध किसी प्रतिस्पर्धा का नहीं, बल्कि आपसी तालमेल और संतुलन का है। उन्होंने कहा कि मानव सभ्यता के विकास में दोनों की भूमिका पहियों के समान रही है। उन्होंने रेखांकित किया कि महिलाएं आज सीमाओं की रक्षा से लेकर हर क्षेत्र में अपनी क्षमता सिद्ध कर रही हैं। उनके अनुसार, अधिकारों की चेतना के साथ-साथ मर्यादा और परस्पर सम्मान का भाव बना रहना चाहिए ताकि सामाजिक ताना-बाना मजबूत रहे।

शहला निगार ने कहा कि भेदभाव की शुरुआत अक्सर घर से होती है, जब लड़कों को विशेष सुविधाएं दी जाती हैं और लड़कियों को दोयम समझा जाता है। निगार ने संपत्ति में महिलाओं के कानूनी अधिकारों के बावजूद सामाजिक संकोच और सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं की निर्बाध आवाजाही को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि समानता तभी सार्थक होगी जब समाज सड़कों और कार्यस्थलों पर महिलाओं की मौजूदगी को बिना किसी समय-सीमा के सहज रूप से स्वीकार करेगा।

वेबिनार में भाग लेते हुए स्वीटी पॉल ने कामकाजी महिलाओं के प्रति पारिवारिक प्रोत्साहन के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी में संस्कारों के निर्माण के लिए बच्चों को समय और मार्गदर्शन देना अत्यंत आवश्यक है। वहीं सरिता कपूर ने रक्षाबंधन पर्व के संदर्भ में अपनी बात रखते हुए कहा कि आधुनिकता और अधिकारों के साथ पारिवारिक मर्यादाओं और कर्तव्यों का पालन भी जरूरी है। कारगिल युद्ध से जुड़े रहे पूर्व सैनिक बृजानंद प्रसाद ने सीमावर्ती क्षेत्रों में सैनिकों के प्रति स्थानीय समाज के सम्मान और रक्षाबंधन के अनुभवों को साझा किया। युवा प्रतिभागी नीति अरोड़ा ने परिवार में बेटी और बहू के प्रति दृष्टिकोण में आने वाले अंतर की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए समानता को पारिवारिक व्यवहार में पूरी तरह उतारने पर जोर दिया।

कार्यक्रम के अंत में उदय मन्ना ने आगामी आयोजनों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 30 अगस्त को युवा पीढ़ी और बच्चों के सकारात्मक मूल्यों पर केंद्रित आरजेएस का 339 वां विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें शांतिकुंज हरिद्वार के प्रोफेसर प्रमोद भटनागर, ब्रह्मा कुमारीज संस्थान दक्षिण दिल्ली की बीके मेधा बहन और अधिवक्ता मोनिका जैन शामिल होंगी। 
इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय पोषण सप्ताह (1-7 सितंबर)की पूर्व संध्या पर आरजेएस का 640वां कार्यक्रम 31 अगस्त 2026 को आरजेएस के राष्ट्रीय ऑब्जर्वर दीप माथुर की अगुवाई में संगठन का मासिक न्यूजलेटर "पाॅजिटिव मीडिया"  जारी किया जाएगा।

नर सेवा, नारायण सेवा में विश्वास रखता है महामाई सेवा न्यास -साहनी
नई दिल्ली। चांदनी चौक, लालकिले के सामने लाजपतराय मार्केट में महामाई सेवा न्यास पंजी के माध्यम से निशुल्क डिस्पेंसरी का उद्घाटन स्थानीय विधायक पुनरदीप सिंह साहनी के करकमलों द्वारा किया गया। 
उद्घाटन समारोह में श्री साहनी ने कहा,नर सेवा नारायण सेवा में विश्वास करते हुए महामाई सेवा न्यास (पंजी)के स्वर्गीय श्री रमेश बजाज साहब ने जो पौधा लगाया था, उसे अब न्यास के पदाधिकारियों और सदस्यों ने इसे वटवृक्ष के रुप में विकसित कर दिया है।इस इलाके में डिस्पेंसरी का होना वक्त की मांग थी,जिसे न्यास ने पूरा किया।
न्यास के प्रमुख भारत भूषण ने बताया,कि लाजपतराय मार्केट सहित आसपास के अन्य क्षेत्रों में हजारों मजदूर भाई दिन-रात काम करते हैं,कई बार वे बीमार हो जाते हैं, प्राईवेट डाक्टरों का खर्चा वो वहन नही कर पाते, इसलिए यहां निशुल्क रुप से बाऊजी रमेश बजाज जी के सपने को साकार करते हुए निशुल्क डिस्पेंसरी बनाई गई है,जो रविवार को छोड़कर प्रतिदिन दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक सूर्या हास्पिटल के वरिष्ठ डाक्टर दीपक राजपूत (फिजिशयन) के सानिध्य में पीडितो का ईलाज करेंगे और निशुल्क दवाईयो का भी वितरण करेंगे।
इस अवसर पर सुदर्शन बजाज, जगवीर सिंह बीरा, श्रीमोहन चोपड़ा, राकेश अरोडा, दिनांक अरोड़ा,नंदी कपूर, बलबीर सिंह, महेंद्र वर्मा,अनुज बजाज,वीरु सिंधी,सुभाष बंगाली,आनंद रोहिल्ला,संजय शर्मा, अतुल निंद्रायोग, कंवलजीत सिंह, चन्द्रशेखर ढींगरा,आशीष बंसल, सत्यनारायण कामा, श्यामलाल सचदेवा, मनमोहन चोपड़ा,दीपक बजाज, आर्यन बजाज, प्रेमनारायण गुप्ता, जितेन्द्र सोनी आदि मौजूद थे। तत्पश्चात न्यास की ओर से भंडारे का भी आयोजन किया गया।

सकारात्मक मीडिया को जन-अभियान बनाने के संकल्प के साथ आरजेएस आजादी पर्व पखवाड़े के समापन पर सहयोगी सम्मानित.

मारवाह स्टूडियोज में पाॅजिटिव‌ मीडिया फैमिली के लिए फिल्म-टीवी-मीडिया वर्कशॉप का होगा आयोजन - डा.संदीप मारवाह 

नई दिल्ली। आरजेएस पॉजिटिव ब्रॉडकास्टिंग हाउस(आरजेएस पीबीएच) द्वारा स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित 15 दिवसीय अंतरराष्ट्रीय आजादी पर्व पखवाड़े का समापन रविवार को एक विशेष वेबिनार के साथ हुआ। कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत करते हुए पटना से शिक्षिका डा.मुन्नी कुमारी ने कहा कि आरजेएस के सकारात्मक आंदोलन का दस्तावेजीकरण एक अद्भुत कार्य है। राष्ट्र प्रथम: वंदे मातरम् से वसुधैव कुटुम्बकम् तक की सकारात्मक सोच के साथ आज हम वैश्विक स्तर पर सकारात्मक क्रांति की ओर कदम बढ़ा चुके हैं।‌ उन्होंने सितंबर महीने में शिक्षा, न्याय और महापुरुषों के योगदान पर परिचर्चा आयोजित करने का संकल्प लिया। 

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं  आफ्ट यूनिवर्सिटी मीडिया एंड आर्ट्स, मारवाह स्टूडियोज तथा नोएडा फिल्म सिटी के संस्थापक डॉ. संदीप मारवाह ने कहा कि आज देश में समाचार पत्रों, पत्रिकाओं, प्रसारण चैनलों और डिजिटल माध्यमों का दायरा अत्यधिक विस्तृत हो चुका है। ऐसे समय में मीडियाकर्मियों को प्रामाणिक जानकारी, शोध और सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ समाज का मार्गदर्शन करना चाहिए। डॉ. मारवाह ने इस अवसर पर घोषणा की कि सोशल मीडिया और पत्रकारिता से जुड़े आरजेएस के साथियों को नई तकनीकों में दक्ष बनाने के लिए मारवाह स्टूडियोज में एक दिवसीय विशेष कार्यशाला आयोजित की जाएगी। उन्होंने आत्मनिर्भरता के विविध आयामों को रेखांकित करते हुए युवाओं से महत्वाकांक्षी, तकनीक-सक्षम, स्व-प्रेरित और परिणाम-उन्मुख बनने का आह्वान किया।

लंदन से जुड़े आरजेएस पॉजिटिव ब्रांच के मानद प्रभारी और इंडियन वेजिटेरियन एंड वीगन सोसाइटी के संस्थापक नितिन मेहता ने कहा कि विदेशों में रहने वाले भारतीय अपनी संस्कृति, योग और शाकाहार के प्रसार के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय मंचों पर देश की सही छवि प्रस्तुत करने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। विदेशी समाचार माध्यमों में आने वाली एकतरफा या भ्रामक खबरों का तथ्यात्मक जवाब देने के लिए प्रवासी समाज लगातार सक्रिय रहता है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि बच्चों में नैतिक मूल्यों और संस्कारों की नींव घर और परिवार से ही मजबूत होती है, इसलिए हम इसपर नये संकल्पों के साथ कार्य करेंगे।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए टेम्पल ऑफ अंडरस्टैंडिंग इंडिया फाउंडेशन के महासचिव डॉ. ए. के. मर्चेंट ने राष्ट्र-प्रथम और वसुधैव कुटुंबकम के सिद्धांतों को एक-दूसरे का पूरक बताया। उन्होंने शिक्षा और पर्यावरण के क्षेत्र में जमीनी स्तर पर कार्य करने की आवश्यकता पर बल दिया। डॉ. मर्चेंट ने कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी के जरिए सरकारी स्कूलों में हो रहे सुधारों और कौशल विकास मंत्रालय के अंतर्गत संचालित प्रशिक्षण केंद्रों के आंकड़ों का उल्लेख किया। इसके साथ ही उन्होंने जानकारी दी कि टेम्पल ऑफ अंडरस्टैंडिंग ने युवाओं को सामाजिक सरोकारों से जोड़ने के लिए मानव रचना विश्वविद्यालय के साथ जो  समझौता है,उससे आरजेएस परिवार को जोड़ने का संकल्प जल्दी ही परिणाम दायक होगा।

कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय मीडिया समन्वयक दीप माथुर ने आजादी पर्व अंतरराष्ट्रीय पखवाड़े में सक्रिय सहभागिता निभाने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं के लिए डिजिटल सम्मान पत्रों की घोषणा की। इनमें आरजेएस युवा पटना, नोएडा शाखा, लंदन शाखा, इंस्पायरिंग इंडियन वुमेन, लंदन & भारत, दिल्ली मेट्रोपॉलिटन एजुकेशन नोएडा और दिल्ली मेट्रोपोलिटन एजुकेशन, नोएडा, आरजेएस टेक्निकल और क्रिएटिव टीम, आरडी फूड प्रोडक्ट्स, ग्रेटर नोएडा,दिल्ली डायरी न्यूज़ आदि शामिल हैं।

इस अवसर पर कार्यक्रम का संचालन करते हुए आरजेएस के संस्थापक एवं राष्ट्रीय संयोजक उदय कुमार मन्ना ने आगामी योजनाओं का विवरण प्रस्तुत‌ किया और बताया कि पाॅजिटिव मीडिया आंदोलन को अब विद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों तक ले जाया जाएगा, इससे जन आंदोलन का आगाज होगा।

दिल्ली मेट्रोपोलिटन एजुकेशन, नोएडा में 7 अगस्त को आजादी पर्व का मुख्य कार्यक्रम लगभग सौ युवाओं के साथ करके लक्ष्य निर्धारित कर दिया गया।

न्यूज फोल्डर के संपादक गुलशन सैफी ने कहा कि समाधानपरक और सकारात्मक पत्रकारिता ही समाज को सही दिशा दे सकती है। उन्होंने वंदे मातरम और राष्ट्रभक्ति के विषयों को विवादों से दूर रखकर राष्ट्रीय एकता को सर्वोपरि रखने का आह्वान किया।

आरजेएस के संस्थापक एवं राष्ट्रीय संयोजक उदय कुमार मन्ना ने आगामी योजनाओं का विवरण प्रस्तुत करते हुए बताया कि आंदोलन को अब विद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों तक ले जाया जाएगा। उन्होंने बताया कि गणतंत्र दिवस को ध्यान में रखते हुए टीम रिपब्लिक डे पहल के माध्यम से समाज में सकारात्मक योगदान देने वाले लोगों को मंच प्रदान किया जाएगा। इसके अतिरिक्त 1 अक्टूबर को राष्ट्रीय स्वैच्छिक रक्तदान दिवस की पूर्व संध्या पर 30 सितंबर को नई दिल्ली स्थित भारतीय रेड क्रॉस सोसाइटी के सभागार में एक राष्ट्रीय मीडिया सम्मेलन आयोजित करने का निर्णय लिया गया है।


वेबिनार में स्वतंत्रता संग्राम के अमर सेनानियों बाजी राउत, खुदीराम बोस, करतार सिंह सराभा, अनंत लक्ष्मण कान्हेरे, प्रफुल्ल चंद्र चाकी, रानी लक्ष्मीबाई और झलकारी बाई के बलिदान को याद किया गया। इसके अलावा रामकृष्ण परमहंस, सुभद्रा कुमारी चौहान और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

सत्र के दौरान विभिन्न प्रतिभागियों ने आगामी महीनों के लिए अपने संकल्प घोषित किए। नोएडा शाखा के प्रभारी उदय शंकर सिंह कुशवाहा ने पर्यावरण संरक्षण और युवा पीढ़ी पर आधारित कार्यक्रमों की घोषणा की। नागपुर से कविता परिहार ने छह माह पर्यावरण जागरूकता पर कार्य करने का संकल्प लिया। नीति अरोड़ा ने रेड क्रॉस रक्तदान जागरूकता और युवाओं को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने की दिशा में कार्य करने की बात कही। पूर्व शिक्षिका सरिता कपूर ने विद्यालयों में नैतिक शिक्षा के प्रसार पर बल दिया, स्वीटी पॉल ने संस्थागत विस्तार का सुझाव रखा और प्रभात फूड प्रोडक्ट्स के निदेशक लक्ष्मण प्रसाद ने भावी सामाजिक आयोजनों में सहयोग का संकल्प दोहराया।

कार्यक्रम का विधिवत समापन डॉ. मुन्नी कुमारी द्वारा प्रस्तुत धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसमें सभी सहयोगियों, तकनीकी दल और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। उन्होंने कहा कि हम सब यहां बस एक किरदार है , जिसका नाटक खत्म होते ही पर्दा गिर जाता है।


आरजेएस पीबीएच 

8368626368

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